भाजपा के पितामह आडवाणी, जिन्होंने रथयात्रा से पार्टी को 2 सीटों से सत्ता के शिखर तक पंहुचाया

New Delhi : 90 के दशक में प्रसारित की हुई रामानंद सागर की रामायण टीवी सीरियल हिट हो चुकी थी। इससे लोग इतने प्रभावित थे कि इस सीरियल के एक्टर्स को असली नाम से नहीं किरदारों के नाम से जानने लगे थें। इस सीरियल के बाद देश के लोग एक और चीज से प्रभावित थे और वह थी रथ यात्रा।

साल 1992 पूरा देश में राम नाम की धूनी रमा रहा था। सड़को पर लोगों का हुजूम एक रथ यात्रा ने पीछे चल रहा था जिसे गुजरात के सोमनाथ से भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने शुरू किया था। रथ यात्रा का आयोध्या में विराजमान रामलला पर कोई असर तो नहीं पड़ा पर भाजापा को इसका फायदा जरूर मिला और वह 2 सीट से 85 पे पहुंच गई।

27 साल पहले जब 1992 को विवादित ढांचा गिराया गया था उसके बाद से भाजपा को जबरदस्त उछाल हासिल हुई थी। इस आंदोलन की अगुआई में लालकृष्ण आडवाणी सबसे बड़ा चेहरा थे। इसी मुद्दे की बुनियाद पर 1989 के लोकसभा चुनाव में 9 साल पुरानी बीजेपी 2 सीटों से बढ़कर 85 पर पहुंच गई थी। उसके बाद 1996 के चुनाव में भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी और 1999 के आम चुनाव में उन्होंने 173 सीटों के साथ सरकार बनाया।

लाल कृष्ण आडवाणी ने की थी राम आंदोलन की अगुआई

बता दें कि, लाखों कारसेवकों के द्वारा विवादित ढांचे को गिराए जाने को लेकर जो आंदोलन शुरू हुआ था उसमे लाल कृष्ण आडवाणी मुख्य चेहरे थे। आंदोलन और मस्जिद गिराए जाने के बाद भी यह मुद्दा गरम रहा और बीजेपी ने सियासत की बुलंदियों को छुआ और उसको जनता से बेशुमार प्यार मिला। एक तरफ जहां कुछ सालों पहले तक भाजपा के पास मात्र 2 लोकसभा सीट थी। वहीं इस आंदोलन और विवादित ढांचे को गिराए जाने के बाद पार्टी को 85 सीट हासिल हुई थी। इससे पहले आडवाणी सितंबर 1990 में सोमनाथ से रथ लेकर मंदिर के लिए जनजागरण करने निकल पड़े थे।

1992 में अयोध्या हालात

करीब 27 साल पहले रामजन्मभूमि अयोध्या में हजारों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था। इस हंगामे के बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे हुए। इसमें हजारों लोग घायल हुए तो वहीं कई इसकी चपेट में भी आये। वहीं अब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराये जाने के दिन छह दिसम्बर को हिन्दू संगठनों ने शौर्य दिवस तथा मुस्लिम संगठनों यौमे गम दिवस मनाते आ रहे हैं।

देश की राजनीति में एक लम्बा अरसा गुजार चुके लाल कृष्ण आडवाणी 92 साल के हो गए है। आडवाणी को भाजपा का पितामह भी कहा जाता है। कहा जाता है कि आडवाणी ने ही गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री का बचाव किया था और आज वह देश के प्रधानमंत्री हैं। – रजत कुमार