हमे घर जाने दो-UP, पंजाब, तमिलनाडु, दिल्ली में रोते बिलखते कामगार सड़कों पर, पैदल ही जाने दो

New Delhi : देश में कई जगहों पर रोते बिलखते कामगार सड़कों पर उतर आये हैं। 17 मई से कामगारों ने देशभर में जो सड़कों पर उतरना शुरू किया वो अब धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है। 18 मई को तिमलनाडु में, पंजाब हरियाणा बार्डर पर, दिल्ली में, दिल्ली यूपी बार्डर पर, गाजियाबाद में सब जगह सड़कों पर उतर आये हैं। सब जगह एक ही शोर है – हमें घर जाने दो। गाजियाबाद में सोमवार को बिहार जाने वाले मजदूरों को रोका गया और उन्हें ट्रेन से भेजने का रजिस्ट्रेशन किया गया। इस दौरान रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में कामगार उमड़ पड़े और सोशल डिस्टेंसिंग का खात्मा हो गया।

हरियाणा के सोनीपत के कोंडली इंडस्ट्रियल एरिया में 2000 से अधिक प्रवासी कामगार इकट‍्ठे हो गये हैं। सब घर भेजे जाने की डिमांड कर रहे हैं। कह रहे हैं कि अगर बस, ट्रेन नहीं दे सकते हो तो हम लोगों को पैदल ही जाने दो। नहीं तो हम यहां पर भूख से मर जायेंगे। इसमें से ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं। अहमदाबाद में पुलिस और प्रवासी कामगारों के बीव में जमकर हंगामा हुआ। प्रवासी मजदूर किसी भी ससूरत में अपने घर जाना चाहते हैं। पुलिस ने बल प्रयोग से रोकने की कोशिश की तो पत्थरबाजी होने लगी। मामला बहुत पेंचीदा हो गया है। सरकार के लिये इन मजदूरों को नियंत्रित कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है।

दिल्ली के गाजीपुर, दिल्ली यूपी बार्डर, पंजाब हरियाणा बार्डर पर भी कामगारों का हंगामा चल रहा है। इन स्थानों पर रविवार को भी मजदूरों ने हंगामा किया। सहारनपुर में प्रवासी मजदूर रविवार सुबह बड़ी तादाद में सड़क पर उतर आये। सड़क जाम कर दी और हंगामा शुरू कर दिया। स्थानीय पुलिस पर सैकड़ों मजदूर भारी पड़े तो आरएएफ को मौके पर बुलाया गया। कामगारों को समझाने की कोशिश की जा रही हैं।

रविवार सुबह मजदूरों का सब्र टूट गया और सभी मजदूर शेल्टर होम से निकलकर अंबाला हाईवे पर आ गये। मजदूरों ने यहां जाम लगा दिया। यहां से बड़ी तादाद में श्रमिक शहर की और पहुंच गये हैं और अंबाला हाईवे को जाम कर दिया है। मजदूर बेहद गुस्से में हैं और इन्होंने हाईवे पर कब्जा कर लिया है।
इधर दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर प्रवासी मजदूरों की भीड़ इकट्ठा हो गई है। गाजीपुर में बड़ी संख्या में मजदूर जुट गये हैं। औरैया सड़क हादसे के बाद यूपी सरकार के उस आदेश के बाद यह भीड़ जुटी है जिसमें कहा गया है कि जो मजदूर पैदल जा रहे हैं उन्हें प्रशासन बस उपलब्ध करायेगी। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक बॉर्डर पर मजदूर लाइन लगाकर बस का इंतजार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वह घर जाने चाहते हैं।

गाजीपुर में जुटी भीड़ को देखकर ऐसा लग रहा है कि किसी को कोरोना संक्रमण का कोई डर नहीं हैं। लॉकडाउन के नियमों की लोग खुले तौर पर धज्जियां उड़ा रहे हैं। कोई शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो रहा है। कल 15 मई को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि लॉकडाउन में पैदल प्रवेश नहीं दिया जायेगा। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने पैदल, दो पहिया वाहन, ट्रक आदि से राज्य की सीमा में आने वाले किसी भी व्यक्ति को दाखिल नहीं होने देने के निर्देश दिये हैं। यदि कोई व्यक्ति सीमा पार कर आ जाता है तो उसे रोकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों के मुताबिक कार्यवाही की जाए। किसी भी प्रवासी व्यक्ति को रेल लाइन अथवा सड़क मार्ग पर चलने नहीं दिया जाए।

उधर, प्रवासी कामगारों को लेकर केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार शनिवार को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) ने दिल्ली के स्टेट नोडल अधिकारी और सभी जिला अधिकारी एवं समकक्ष पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किये। इसमें प्रवासी कामगारों को सड़क या रेल पटरी पर पैदल न चलने देने को कहा गया है। आदेश के अनुसार सड़क या पटरी पर चलते मिलने पर प्रवासी कामगारों को समझा कर पास के शेल्टर होम में ठहराने और उनके खाने पीने का इंतजाम करना है। जब तक कि उनको घर जाने के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेन में नहीं बैठा दिया जाता।

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