अलग-अलग भाषाएं सीखने से आपकी बौद्धिक क्षमता का होता है विकास

New Delhi: अगर आप अपना बौद्धिक विकास करना चाहते हैं तो आपके लिए नई भाषाओं को सीखना एक बहुत ही कारगर कदम हो सकता है। इससे आपको आपके कैरियर में तो निश्चित तौर पर मदद मिलेगी ही साथ ही इससे आपका बौद्धिक विकास भी होगा।

इस बारे में ऐम्स के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी इंसान को दो से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान हो तो इससे उसके दिमाग के अलग-अलग हिस्से सक्रिय हो जाते हैं। इससे उस इंसान को ध्यान को एकाग्र करने में तो मदद मिलती है ही साथ ही इससे उसकी दिमाग की ताकत का भी विकास होता है। डॉक्टरों का तो सरकार से ये भी आग्रह है कि सरकार को इंटरनेट गेमिंग को बैन करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिये, पबजी और दूसरी सोशल मीडिया ऐप्स बच्चों के लिए एक ख’तरा हैं।

एम्स में न्यूरोलॉजी की प्रोफेसर डॉ मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र सरकार का हिन्दी पर राष्ट्र के रूप में जोर देना एक स्वागत योग्य कदम है। इस तरह जिन लोगों को ये भाषा नहीं आती है वो धीरे-धीरे इस भाषा को सीखेंगे और अलग भाषाओं को सीखना दिमाग के बौद्धिक विकास के लिए बहुत ही अच्छा है। उन्होंने ये भी बताया कि कई अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों में ये बात का साबित हुई है कि दूसरी भाषा सीखने से दिमाग के बौद्धिक काम करने के तरीके में सुधार आता है और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कब सीख रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ये साबित हो चुका है कि जिन व्यस्कों की दो भाषाओं पर अच्छी पकड़ होती है ध्यान के टेस्ट में उन लोगों से बेहतर प्रदर्शन किया जिनकी केवल एक भाषा पर पकड़ थी। इतना ही नहीं उनके प्रदर्शन पर इस बात को कोई फर्क नहीं पड़ा कि उन्होंने ये भाषा कब सीखी है।