सीखें जीवन जीने की कला जग्गी वासुदेव के विचारों के संग

अगर आपको लगता है कि आप जीवन का आनंद नहीं ले पा रहे हैं या फिर आप अपने जीवन से खुश नहीं हैं तो इसका मतलब है कि आपको जीवन जीने की कला नहीं आती। वास्तव में जीवन जीना भी एक कला है ये कला हर इंसान को नहीं आती, कुछ ही लोग होते हैं जो कि कला को सीख पाते हैं। हम बचपन से बहुत ही चीजें सीखने पर जोर देते हैं लेकिन सबसे जरूरी कला को सीखना इस बीच भूल ही जाते हैं ये ही जीवन जीने की कला है। हर चीज का ज्ञान इंसान को इसी धरती पर आकर ही होता है तो अगर आपको भी जीवन जीने की कला नहीं आती है तो ज्यादा परेशान होने ही जरूरत नहीं है। तो चलिए आज हम आपको ये ही जीवन जीने की कला सीखने में मदद करने के लिए सदगुरु जग्गी वासुदेव के विचारों से परिचित कराते हैं-

1.कोई काम तनावपूर्ण नही होता, यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप अपने शरीर, मस्तिष्क और भावना को कैसे बनाते हो जिससे वह तनाव पूर्ण न लगे।

2.ज्यादातर लोग पंछी की तरह पिंजरे में रहते हैं, पिंजरे का दरवाजा तो खुला है लेकिन वह पिंजरे में ही इतने व्यस्त हैं कि कोई और संभावना उन्हें दिखती नही।

3.तुम अपनी ज़िन्दगी के मकसद को अपनी जरूरत बना लो, फिर वह तुमसे ज्यादा दूर नही होगी।

4.एक इंसान बीज की तरह है या तो आप इसे वैसे ही रख सकते हैं, या फिर उसका विकास करके फल, फूल ले सकते है।

5.लोग बाहर से अपनी ज़िन्दगी को पूर्ण करने की कोशिश करते है लेकिन असल में जीवन की गुणवत्ता हमारे अंदर जी जिन्दगी पर आधारित होती है।

6.जो कुछ भी बनाया जा सकता है वह पहले से ही बनाया जा चुका है। हम इंसान सिर्फ नक़ल करते हैं बनाते नहीं हैं।

7.ज़िम्मेदारी का अर्थ है कि आप अपने जीवन में किसी भी स्थिति का सामना कर सकते हैं।

8.झुंझलाहट, निराशा और अवसाद का मतलब है कि आप स्वयं के विरुद्ध काम कर रहे हैं।

9.दो लोग एक जैसे नही होते, आप लोगों को समान नहीं कर सकते, आप केवल उन्हें समान अवसर दे सकते हैं।

10.एक सांप किसी भी अन्य प्राणियों की तुलना में अधिक जानता है कि उसके आसपास क्या हो रहा है क्योंकि सांप के पास इधर-उधर की बात सुनने के लिए कान नहीं होते।