असम : बाढ़ के पानी में फंसे लोगों के लिए मसीहा बन कर सामने आ रहे हैं भारतीय सेना के जवान

New Delhi: असम में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। इसकी वजह से राज्य के कई जिलों के करीब 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य में अब भारतीय सेना के जवानों ने कमान संभाल ली है। तस्वीरें सामने आई है, जिसमें जवानों द्वारा बाढ़ के पानी में फंसे स्थानीय लोगों को बचाया जा रहा है।

भारतीय सेना के सैनिकों द्वारा निचले असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बाढ़ राहत अभियान चलाया जा रहा है। पिछले छह दिनों में 450 नागरिकों को राहत देने के साथ कुल 488 नागरिकों को निकाला गया है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने असम के लिए 251.55 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की था। असम के धेमाजी, बिश्वनाथ, सोनितपुर, दरंग, बक्सा, बारपेटा, नलबाड़ी, चिरांग, बोंगाईगांव, कोकराझार, गोलपारा, मोरीगांव, होजई, नागांव, गोलाघाट, मझौली, जोरहाट, शिवसागर, डिब्रूगढ़, तिवारीगढ़, लगभग 1,556 गाँव बाढ़ की चपेट में हैं। बारपेटा 7.35 लाख लोगों के साथ सबसे बुरी तरह प्रभावित है। इसके बाद मोरीगांव में 3.50 लाख लोग प्रभावित हैं। धुबरी में, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार से लगभग 3.38 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
इस बीच, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा कि सोमवार दोपहर तक बाढ़ के कारण4,175 गांवों के 46.28 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही 90,000 हेक्टेयर के करीब कृषि भूमि डूब गई हैं। राज्य में बाढ़ और भूस्खलन में 15 लोग मा’रे गए हैं।
बाढ़ से इंसानों के साथ-साथ जानवर भी प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के चलते काजीरंगा का 90% हिस्सा अभी पानी में है।, जिससे अनुमानित 10 लाख पशु प्रभावित हुए हैं। बाढ़ जंगली जीवन को भी प्रभावित करता है। यह तब बढ़ जाता है जब निवास स्थान कम हो जाते हैं। ऐसी आपदा के समय में उनके लिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। हर साल बाढ़ से इसी तरह राज्य में जान माल की हानि देखी जाती है। पशुओं को भी बाढ़ के चलते कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है