राजनीतिक चौकीदार नहीं! जानिए चौकीदार मंदिर के बारे में

New Delhi: आज एक बार फिर चौकीदार शब्द चर्चा में है। क्यों चर्चा मैं है ये तो आप जान ही गए हैं। अगर नहीं जान पाए हैं तो इसी खबर में उसके बारे में लिंक भी है। इस चर्चा से अलग हम आपको बताएँगे चौकीदार मंदिर के बारे में। गुजरात के नर्मदा जिले में चौकीदार को समर्पित देवदरवनिया चौकीदार मंदिर (Chowkidar Temple) है, जहां सदियों से एक ‘चौकीदार’ की पूजा होती आ रही है।

देदियापाड़ा स्थित देव मोगरा गांव के निवासियों का मानना है कि देवदरवनिया चौकीदार सालों से उनके गांव की रक्षा कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान सभी ने पीएम मोदी के मुंह से चौकीदार शब्द बार-बार सुना। यहां तक की लोग अपने नाम के आगे चौकीदार लगाकर गर्व भी महसूस कर रहे थे, लेकिन देदियापाड़ा के लोग चौकीदार की भगवान के रूप में लंबे समय से पूजा कर रहे हैं।

चौकीदार मंदिर

देवी के मंदिर के पास बना चौकीदार का मंदिर
लोक मान्यताओं के अनुसार, देवी पंडोरी ने नाराज होकर घर छोड़ दिया था। राजा पंडादेव ने उनकी तलाश करनी शुरू की और अपना घोड़ा देव मोगरा गांव में रोका। इसी वजह से यह जगह स्थानीय लोगों के लिए पूजनीय हो गई और बाद में वहां पंडोरी माता का मंदिर बनवाया गया। इस मंदिर से कुछ दूरी पर देवदरवनिया चौकीदार के लिए भी एक प्रार्थना स्थल बनाया गया।

दूसरे राज्यों से भी आते हैं श्रद्धालु
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, मान्यता है कि देवदरवनिया चौकीदार देवी और हमारे गांव की रक्षा करते हैं। जो भक्त पंडोरी माता की पूजा करने आते हैं, उन्हें पहले चौकीदार मंदिर के दर्शन करने होते हैं। यहां सिर्फ गुजरात से ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश से श्रद्धालु आते हैं।

चौकीदार को प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है शराब
दिवाली और नवरात्र के दौरान माता के मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। चौकीदार मंदिर में भी श्रद्धालु बराबर आते हैं।’ दिलचस्प यह है कि गुजरात में वैसे तो श’राब की बिक्री बैन है लेकिन देवदरवनिया चौकीदार को लोग देशी श’राब प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं।