करतारपुर कॉरीडोर को हरसिमरत बादल ने बताया भारत-पाकिस्तान के बीच शांति का गलियारा

New Delhi: आज दशकों से बन रहे करतारपुर कॉरीडोर का उद्घाटन किया गया। यहां (भारत) से प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन किया तो दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कपाट खोले। इसके साथ ही दोनों देशों के मेलजोल का भी संदेश दिया गया। इसी भावना को दिखाते हुए केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि जिस करतारपुर कॉरिडोर का आज उद्घाटन किया गया, वह दो देशों में शांति लाएगा।

पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब के पहले जत्थे में शामिल होकर दर्शन कर वापस लोटीं बादल ने कहा, “यह एक सुखद अनुभव था। लोग उत्साहित हैं। वहां व्यवस्थाएं बहुत अच्छी थीं। हम खुश हैं कि हम कभी भी वहां अरदास करने जा सकते हैं। मैं अपनी सरकार और पाकिस्तान सरकार को भी धन्यवाद देती हूं।”

लोकसभा सांसद सुखबीर सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में जाना एक अद्भुत अनुभव था। उन्होंने कहा, “उन्होंने इसका निर्माण अच्छे तरीके से किया है। दोनों सरकारों ने असंभव चीजों को संभव कर दिया है। यह विश्व का गंतव्य स्थल बनने जा रहा है।”

इससे पहले दिन में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर के एकीकृत चेक पोस्ट का उद्घाटन किया। मोदी के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और हरसिमरत कौर बादल और अभिनेता और गुरदासपुर के सांसद सनी देओल उद्घाटन के समय उपस्थित थे।

एकीकृत चेक पोस्ट या यात्री टर्मिनल भवन वह है जहाँ तीर्थयात्रियों को नव-निर्मित गलियारे के माध्यम से यात्रा करने की मंजूरी मिलेगी। चेक पोस्ट से भारतीय तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने की सुविधा मिलेगी।

कॉरिडोर का उद्घाटन, जो पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक मंदिर को पाकिस्तान के गुरुद्वारा करतारपुर साहिब से जोड़ता है, 12 नवंबर को सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव की 550 वीं जयंती से पहले किया गया है। डेरा बाबा नानक के लिए जाने से पहले, प्रधानमंत्री ने सुल्तानपुर लोधी में ऐतिहासिक बेर साहिब गुरुद्वारे में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव के अनुयायियों की आकांक्षाओं और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस गलियारे को डिजाइन और गुणवत्ता मानकों पर तैयार किया गया है। गुरु नानक सिख धर्म के संस्थापक और दस सिख गुरुओं में से पहले थे। उनका जन्म पंजाब (आधुनिक पाकिस्तान) में हुआ था और उन्होंने सृष्टि की सार्वभौमिक दिव्यता के आधार पर आध्यात्मिक शिक्षा दी थी।