मात्र 23 साल की उम्र में देश के लिए शही’द हो गया बेटा, जिसको याद करके आज रोते हैं पिता

New Delhi :  साल 1999 में हुआ कारगिल यु’द्ध न सिर्फ पाकिस्‍तान पर भारत की विजय गाथा का उदाहरण है, बल्कि इसके साथ ही उन तमाम देश के वीर सपूतों का बलिदान स्तंभ भी है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सबकुछ कुर्बान करके श’हादत को गले लगाया। वैसे तो ज्यादातर जवान यु’द्ध के दौरान श’हीद हुए थे, लेकिन भारत का एक लाल ऐसा भी था, जिसकी कु’र्बानी को कारगिल यु’द्ध की पहली श’हादत माना गया।

एक ऐसी श’हादत, जो जंग शुरू होने से पहले ही दी गई। ये कहानी है श’हीद कैप्टन सौरभ कालिया और उनके पांच साथियों (नरेश सिंह, भीखा राम, बनवारी लाल, मूला राम और अर्जुन राम) की। सौरभ कालिया की उम्र उस वक्त 23 साल थी। उन्हें फौज की सेवा में बस एक महीने हुए थे, यहां तक कि उन्हें पहली सैलरी भी नहीं मिली थी, लेकिन इसी दौरान वो श’हीद हो गए।

बता दें कि 23 साल के सौरभ कालिया भारतीय सेना की 4 जाट रेजीमेंट में कैप्‍टन थे। उन्होंने ही सबसे पहले कारगिल में पाकिस्तानी सेना के नापाक इरादों की भारतीय सेना को जानकारी दी थी। कैप्टन सौरभ कालिया 5 मई 1999 की रात अपने पांच साथियों के साथ लद्दाख के बजरंग पोस्ट पर पेट्रोलिंग कर रहे थे।

तभी उन्हें पाकिस्तानी घुस’पैठियों की सूचना मिली। कैप्टन सौरभ उनसे लोहा लेने के लिए निकल पड़े। घुस’पैठिए पहले से ही घात लगाये बैठे थे। उन्होंने कैप्टन सौरभ और उनके पांच साथियों को पकड़ लिया गया। फिर बंधक बनाकर 22 दिनों तक टॉर्चर किया। तीन हफ्ते बाद उनके शव क्ष’त-वि’क्षत हालत में भारतीय सेना को मिले। उनकी पहचान करना तक मुश्किल था। पाकिस्तानी घुस’पैठियों की इस हरकत के खिलाफ देश के लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिला था।

बेटे को याद करके रोते हैं पिता : श’हीदों के परिवार वाले अब भी बेटे और भाइयों की कु’र्बानी को भूल नहीं पाए हैं। करगिल यु’द्ध के दौरान पाकिस्तान की हिरासत में बेरहमी से मा’रे ग’ए कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया का कहना है कि वह बेटे की कु’र्बानी को भूले नहीं है। वो जानना चाहते हैं पाकिस्तान में उनके बेटे के साथ क्या हुआ। वह जल्द ही इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए एनके कालिया ने कहा, ‘हम समझते हैं कि यह दो देशों के बीच एक मुद्दा है, मैं आशावादी हूं और लड़ाई जारी रखूंगा। उन्होंने कहा कि सौरभ कालिया का मुद्दा भारतीय सशस्त्र ब’ल की गरिमा और सम्मान का मुद्दा है, जिसको उठाना जरूरी है।