जब कारगिल में गो’लीबा’री के दौरान जवानों के बीच रणभूमि में पहुंचे थे अटलजी-बढ़ाया सेना का हौंसला

New Delhi :  दुनिया की सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में ल’ड़ा गया कारगिल यु’द्ध को जीतने में जांबाजों के पराक्रम का लोहा दुनिया ने माना। हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज भी जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए 13 जून 1999 को खुद रणभूमि में आ पहुंचे।

ऐसे में उनको निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान की ओर से जमकर फा’य’रिंग हुई। इसके बावजूद प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को शहर के जांबाज कर्नल जीपीएस कौशिक ने रणभूमि के उस हिस्से तक पहुंचाया जहां से यु’द्ध की पूरी प्लानिंग की गई। कारगिल युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को भारत को पाकिस्तान के खिलाफ जीत हासिल हुई। हमारे देश की सेना और वायु सेना ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तानी सैनिकों को सीमा पार वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। भारत और पाकिस्तान के बीच यह युद्ध काफी ऊंचाई पर ल’ड़ा गया, जिसकी वजह से दोनों देशों की सेनाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

यह बात 1999 की है। एक दिन ताशी नामग्याल (एक किसान) कारगिल के बाल्टिक सेक्टर में अपने नए याक की तलाश कर रहे थे, जो कहीं पर खो गया था। वे पहाड़ियों पर चढ़कर यह देख रहे थे कि उनका याक कहां गायब हो गया है? ढूंढ़ते-ढूंढ़ते उनका याक नजर आ गया, लेकिन उसके साथ-साथ उन्हें जो चीज दिखी उसे ही कारगिल युद्ध की पहली घ’टना माना जाता है। यहां पर उन्होंने कुछ संदिग्ध लोगों को देखा और भारतीय सेना को तत्काल इसके बारे में जानकारी दी।

भारतीय सेना ने पहले इसके बारे में सरकार को सूचित नहीं किया भारतीय सेना के जवान खुद अपने स्तर से कार्रवाई करने में जुट गए, लेकिन जब भारतीय नेतृत्व को पाकिस्तानी सैनिकों के मंसूबे के बारे में पता चला, तो उनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ से फोन पर कहा कि आपने हमारे साथ बहुत ही बुरा सुलूक किया है। एक तरफ तो आप लाहौर में हमसे गले मिल रहे थे, दूसरी तरफ आपके सैनिक कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा जमा रहे थे।