कानपुर मेट्रोः काम की बढ़ी रफ़्तार के बीच 1000 के पार पहुंचा मजदूरों का आंकड़ा, मेट्रो द्वारा दी जा रही रिहाइश की सुविधा से मजदूरों में बढ़ा भरोसा

कानपुर
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी), कानपुर मेट्रो परियोजना के सिविल निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के हर संभव प्रयास कर रहा है और ये प्रयास रंग भी ला रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत काम करने वाले श्रमिकों की संख्या का आंकड़ा आज 1000 के पार पहुंच गया। कानपुर मेट्रो परियोजना के सिविल निर्माण कार्य वर्तमान में दो मुख्य भागों में बंटे हुए है, पहले भाग के अंतर्गत कास्टिंग यार्ड और 9 किलोमीटर के प्रयॉरिटी कॉरिडोर (आईआईआईटी से मोतीझील) एवं दूसरे भाग के अंतर्गत पॉलिटेक्निक स्थित मेट्रो डिपो का काम हो रहा है। कास्टिंग यार्ड, प्रयॉरिटी कॉरिडोर और डिपो को मिलाकर कुल 1006 श्रमिक काम पर लगे हुए हैं, जिसमें से कास्टिंग यार्ड-कॉरिडोर पर 838 और मेट्रो डिपो में 168 काम कर रहे हैं।

यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक श्री कुमार केशव ने मजदूरों की बढ़ती संख्या और काम की तेज़ होती रफ़्तार को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, “लॉकडाउन के बाद कानपुर में हमने बेहद सीमित वर्कफ़ोर्स के साथ काम की शुरुआत की थी, लेकिन काम को पहले जैसी रफ़्तार देने की कोशिश जारी रही। मेहनत रंग लाई और मजदूरों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ। साथ ही, 15 मई, 2020 से कॉरिडोर (सड़क पर) पर दोबारा काम शुरू होने के बाद से अभी तक कुल 228 पाइल्स और 7 पिलर्स तैयार किये जा चुके हैं।”

रहने की उपयुक्त व्यवस्था से बढ़ा मजदूरों का भरोसा

कास्टिंग यार्ड में मजदूरों के रहने के लिए लेबर कैंप तैयार हो रहे हैं जिसका काम आधे से ज़्यादा पूरा भी हो चुका है। लेबर कैंप्स के लिए 104 कमरे तैयार कराए जाने हैं, जिनमें से लगभग 70 कमरे तैयार हो चुके हैं। लेबर कैंप्स में सोशल डिस्टेन्सिंग का ध्यान रखते हुए, एक कमरे में 7 मजदूरों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जबकि एक कमरे की वास्तविक क्षमता 10 मजूदरों के रहने की है। मजदूरो की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। गौरतलब है कि निर्माण स्थल पर तैनात मजदूरों में से आधे से ज़्यादा उत्तर प्रदेश के ही हैं।

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