दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेट एयरवेज के पूर्व अध्यक्ष नरेश गोयल को अंतरिम राहत देने से किया इनकार

New Delhi: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जेट एयरवेज के पूर्व अध्यक्ष नरेश गोयल की याचिका को लेकर केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहती है। गोयल ने अपनी दायर याचिका में लुकआउट सर्कुलर को खत्म करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति सुरेश काइट ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तारीख तय की है। गोयल को कोई भी अंतरिम राहत देने से उच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया है।

गोयल ने अपनी याचिका में कहा है कि 25 मई को वह अपनी पत्नी के साथ विदेशी निवेशकों के साथ बैठक के लिए विदेश जा रहा था। उन दोनों को विमान से उतार विदेश जाने से रोक दिया गया। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद लुकआउट सर्कुलर की कॉपी उन्हें नहीं दी गई। गोयल का कहना है कि किसी भी एफआईआर में उसका नाम दर्ज नहीं है। इसलिए वह आ’रोपी नहीं है।

सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह 18,000 करोड़ रुपये की गं’भीर धोखा’धड़ी थी। इस संबंध में जां’च जारी है। दस्तावेज दाखिल करने के लिए कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा गया है। गोयल के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को 10 जुलाई तक विदेश यात्रा करनी थी। अपने NRI स्टेटस का बचाव करने के लिए यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण थी। यात्रा की अनुमति नहीं देना मौलिक अधिकारों का उल्लं’घन है। गोयल को विदेशी निवेशकों से मिलने की जरूरत है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि निवेशकों से फोन पर बात की जा सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर भी बात की जा सकती है। न्यायाधीश ने कहा कि अगर वह विदेश जाना चाहता है तो वह 18,000 करोड़ रुपये जमा करके ऐसा कर सकता है। कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि विदेश जाने का अधिकार सीमित है। कई लोग विदेश भागते हैं और फिर सरकार को उन्हें वापस लाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।