पाकिस्तान ने 9/11 हमलों के बाद अमेरिका का साथ देकर सबसे बड़ी भूल की: इमरान खान

New Delhi: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि 9/11 के हमलों के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ देकर बड़ी भूल की। इमरान खान ने न्यूयॉर्क में काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (सीएफआर) थिंक टैंक में हुए एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान की सरकार ने 9/11 के हमले के बाद उन आतंकी समूहों के प्रति अपनी नीति बदल ली थी लेकिन पाकिस्तान की सेना बदलना नहीं चाहती थी। इसी वजह से पाक को आतंकी हमलों का शिकार होना पड़ा।

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने 9/11 के बाद अमेरिका का साथ देकर सबसे बड़ी भूल की। इसमें 70,000 पाकिस्तानी मारे गए। कुछ अर्थशास्त्री कहते हैं कि इससे अर्थव्यवस्था को 150 बिलियन तो वहीं कुछ कहते हैं कि 200 बिलियन का नुकसान हुआ।”

खान ने कहा कि 1980 के दशक में सोवियत संघ से लड़ने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद से जिहाद छेड़ा था। उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन ने उन्हें वॉशिंगटन बुलाकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका की मदद से ISI ने दुनियाभर के मुस्लिम देशों से आतंकियों को बुलाकर ट्रेनिंग दी ताकि वे सोवियत यूनियन के खिलाफ जेहाद कर सकें। अफगानिस्तान में सोवियत संघ से लड़ने के लिए जिन समूहों को ट्रेनिंग दी गई थी अमेरिका ने उन्‍हीं को ही आतंकवादी मान लिया था।’

जब इमरान से यह पूछा गया कि अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन की ऐबटाबाद में मौजूदगी और यूएस नेवी सील्स के हाथों मारे जाने की घटना की पाक सरकार ने जांच क्यों नहीं कराई तो इस पर इमरान ने कहा, हमने जांच की थी, लेकिन मैं कहूंगा कि पाकिस्तानी सेना, आईएसआई ने 9/11 से पहले अल कायदा को प्रशिक्षित किया था। इसलिए हमेशा लिंक जुड़ते रहे। आर्मी में कई ओहदेदार 9/11 के बाद बदली नीति से सहमत नहीं हुए।’

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