JDU का बयान, गृहमंत्रालय का फैसला गलत, सुरक्षा एंजेंसियों से वापस ले डेटा जांच के अधिकार

New Delhi: अब आपके कंप्यूटर पर सुरक्षा और खुफिया एंजेंसियों की नजर हैं। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से अब सभी सुरक्षा एंजेंसियों को कंप्यूटरों के डाटा जांचने के अधिकार दे दिए हैं। 20 दिसंबर, 2018 को गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कुछ एजेंसियों को यह अधिकार देने की बात कही गई है कि वे इंटरसेप्शन, मॉनिटरिंग और डिक्रिप्शन के मकसद से किसी भी कंप्यूटर के डेटा को खंगाल सकती हैं।

केन्द्र सरकार के इस फैसले पर जनता दल यूनाइटेड ने आपत्ति जताई। जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने इसे निजता का अधिकार का उल्लंघन करार दिया। केसी त्यागी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर वह अपना विरोध दर्ज कराएंगे। साथ ही कहा कि राजनाथ इस आदेश को वापस ले। वहीं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा है कि हम इसका विरोध करेंगे। वहीं सपा भी सामने आई।

सपा सांसद रामगोपाल ने कहा है कि 4 महीने बाद दूसरी सरकार होगी कि बीजेपी अपने लिए गड्ढा न खोदे। इसके अलावा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलीमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जाहिर की। ओवैसी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने महज एक सामान्य से सरकारी आदेश के जरिए देश में सभी कंप्यूटर की जासूसी का आदेश दे दिया है। ओवैसी ने कहा कि क्या केन्द्र सरकार इस फैसले से ‘घर-घर मोदी’ का अपना वादा निभा रही है। इसके साथ ही ओवैसी ने कहा कि 1984 में आपका स्वागत है।

central agencies

केंद्र सरकार ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के धारा 69 के तहत यदि एंजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक होता हैं तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद डाटा को जांच सकती हैं और उस पर कार्रवाई भी कर सकती हैं। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें देश के दुश्मन हनीट्रैप के जरिए सेना के अधिकारियों और संवेदनशील पदों पर बैंठे अधिकारी से खुफिया जानकारी हासिल कर लेते हैं।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने जिन सुरक्षा व खुफिया एंजेसियों को अधिकार दिया हैं, उनमें आईबी, रॉ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, ईडी, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, सीबीआई, दिल्ली पुलिस के आयुक्त, एनआईए और जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर तथा असम के सिगनल इंटेलीजेंस निदेशालय शामिल है।

10 एजेंसियो को कॉल या डेटा इंटरसेप्ट करने का अधिकार दिया गया। इसके लिए अब सुरक्षा एंजसियों किसी शख्स या संस्थान की जांच के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया जायेगा। अब एंजिया किसी के भी मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर आदि से जानकारी हासिल कर सकती हैं।

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