बघीरा, ITBP का वो जांबाज सिपाही जिसने जानपर खेलकर बचाई कई सैनिकों की जान

New Delhi : वफादारी= कुत्ता। जी हां जब जब वफादारी की बात आती है कुत्ता ही सबसे पहले जहन में आता है। इंसानों के सबसे करीब अगर कोई जानवर है तो वो कुत्ता ही है। कुत्ते के भीतर एक ऐसी ख़ासियत होती है कि वह पलक झपकते ही इंसान के इशारे को समझ लेता है और उसके अनुरूप काम करता है इसलिए दुनिया भर के सैन्य टीम में कुत्तों को भी शामिल किया गया है। यूँ कहें तो हमारी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में कुत्तों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

कुछ महीने पहले छत्तीसगढ़ में एक नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान एक कुत्ता हीरो बन कर उभरा है। आईटीबीपी समेत देश की तमाम फौजें इस अभियान को सफल बनाने में लगी हुई है। इस अभियान में उनका एक भरोसेमंद साथी बघीरा भी शामिल है। जी हाँ, बघीरा एक डाबर मैन कुत्ता है, जो आईटीबीपी की टीम का अभिन्न हिस्सा है।

बघीरा की मदद से जवानों ने राजनांदगांव जिले के मानपुर- बसेली रोड पर जमीन के नीचे दबाए गए 20 किलो आईईडी वि’स्फोटक को बरामद करने में सफल रहे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह वि’स्फोटक एक वैक्यूम पैकिंग में बरामद हुआ है। जिसे बाइक में इस्तेमाल किए जाने वाले स्पार्क प्लग से जोड़ा गया था। ऐसा न’क्सलियों द्वारा ध’माका करने के लिए पहली बार किया गया था।

अगर इस बहादुर कुत्ते द्वारा समय पर ब’म की जानकारी नहीं मिलती, तो फिर एक बड़ा विस्फोट हो सकता था और हम कई जवानों को खो देते। बघीरा विशेष रूप से आईटीबीपी द्वारा प्रशिक्षित 20 डाबर मैन में से एक है। सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए उसे छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है।

आईटीबीपी कथित तौर पर पहली भारतीय फ़ोर्स है जिसने डाबर मैन को अपनी टीम में शामिल किया है। इसकी मदद चरमपंथियों का पता लगाने, विस्फोटकों का पता लगाने और हैंडलर के आदेश से, विरोधी के ऊपर हमला करना है। बघीरा ने साबित कर दिया है कि, प्रशिक्षित कुत्ते दिए गए आदेशों को पूरा करने में बेहद कुशल हैं।