इंडियन रेलवे पर अब इसरो रखेगा निगरानी, ट्रेनों की सुधरेगी रफ्तार और टलेंगे हादसे

New Delhi : रेलगाड़ियों की आवाजाही पर नज़र रखना एक कंट्रोलर का काम होता है। देव जिंद का एक रेलवे गार्ड है जो दिल्ली के 38 सेक्शन कंट्रोलर्स में से एक है। उसके अंडर दिल्ली और अंबाला के स्टेशन आते हैं। अपनी छह घंटे की सर्विस में वो ट्रेनों की आवाजाही को मॉनीटर करने में बिजी रहता है। किस रेल को आगे जाना चाहिए और कहां पर ब्लॉक की रिपेयर की जाएगी कंट्रोलर की निगरानी पर डिपेंड करता है।

ये रेलवे है भारत की लाइफ लाइन।
ये रेलवे है भारत की लाइफ लाइन।

इसरो के साथ में जुड़ जाने से अब एक कंट्रोलर को सारा डाटा खुद हैंडल नहीं करना पड़ेगा। अब उसके पास ट्रेन के मूवमेंट्स पर नज़र रखने का समय बचेगा। इससे रेलगाड़ियों के टाइम में सुधार होगा। जैसे पहले जिन रास्तों पर ट्रेनें औसतन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती थीं वहां किन्ही कारणों की वजह से 60-70 की रफ्तार से ही दौड़ पा रही हैं। पहले सिर्फ ट्रेनों की आवाजाही और उनके बीच में आने वाले स्टेशनों पर ही नज़र रखी जाती थी। नए बदलावों के आने से धीरे – धीरे ट्रेनों की गति में सुधार होगा। 12000 इंडियन ऑड लोकोमॉटिव्स में रियल टाइम ट्रेन इन्फोरमेशन सिस्टम लगा दिया गया है। जीसैट सैटेलाइट के जरिए ये सिस्टम काम किया करेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए इंडियन रेलवे को लगभग 120 करोड़ की लागत आएगी।

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ये सारा नेटवर्क एक साल के अंदर कवर कर लिया जाएगा। अभी सुरक्षा नियमों की वजह से सारी जानकारी नहीं दी जा सकती है। RTIS पहले कुछ रूट्स पर जैसे मुंबई कटरा, नई दिल्ली – पटना, नई दिल्ली – अमृतसर और दिल्ली – जम्मू में लगवाया गया था। इससे पहले इसरो ने जुलाई-सितंबर 2017 में इसे पायलट प्रोजेक्ट की तरह चलाया था।