इकबाल अंसारी ने किया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से किनारा, कहा-अयोध्या पर फैसला सभी करें स्वीकार

New Delhi: अयोध्या विवाद पर सुनाए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) द्वारा दायर की जा रही पुनर्विचार याचिका से इकबाल अंसारी ने किनारा किया है। उन्होंने कहा है कि इस विवाद को अब यहीं खत्म करना चाहिए और सभी को कोर्ट के फैसले को स्वीकार करना चाहिए।

इकबाल अंसारी हाशिम अंसारी के बेटे हैं जिन्होंने सबसे पहले अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इकबाल ने गुरुवार को अयोध्या में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “मैं इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाना चाहता क्योंकि लोग इस पर राजनीति करते हैं। मैंने फैसला स्वीकार कर लिया है और दूसरों से कहा है कि इस मामले को स्वीकार कर लिया जाए। मामला अब बंद होना चाहिए।”

AIMPLB ने कोर्ट के फैसले के बाद कुछ हफ़्ते में फैसला किया कि वह पुनर्विचार याचिका दायर करेगा जिसमें शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा करने की मांग की जाएगी। इस याचिका में ये भी कहा गया है कि बॉर्ड कोर्ट द्वारा मस्जिद के निर्माण के लिए दी गई पांच एकड़ की वैकल्पिक भूमि को स्वीकार करने के खिलाफ है।

इकबाल ने कहा, “मेरा अनुरोध है कि मेरे घर के सामने जमीन दी जाए। मैं राम-रहीम अस्पताल बनाऊंगा, ताकि स्थानीय लोग ही नहीं, यहां तक ​​कि आस-पास के इलाकों से भी लोग आकर इलाज करा सकें।”

इस महीने की शुरुआत में, तत्कालीन CJI रंजन गोगोई की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से राम लला के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि 2.7 एकड़ में फैली पूरी विवादित जमीन को सरकार द्वारा गठित एक ट्रस्ट को सौंप दिया जाएगा, जो इस जमीन पर राम मंदिर के निर्माण कराएगा।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच परामर्श के बाद एक मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन आवंटित की जानी चाहिए।