अब ट्रेन के जनरल डब्बे में पहले आओ पहले पाओ की व्यवस्था, जल्द लगेगा बायोमेट्रिक सिस्टम

New Delhi: भारतीय रेल्वे की ट्रेनों में हर वर्ग के हिसाब से कोच की व्यवस्था है। आपके पास पैसा है और अच्छे से लग्ज़री में यात्रा करना चाहते हैं तो ए.सी फर्स्ट क्लास में यात्रा कीजिए। उससे थोड़ा कम पैसा हो तो ए.सी 2 टियर में और उससे भी कम तो ए.सी 3 टियर का विकल्प आप के पास मौजूद होता है। इसके बाद आता है स्लीपर क्लास का नंबर जिसमें अधिकतर मिडिल क्लास का आदमी दिखाई देता है। आखिरी में जो नंबर है वो जनरल डब्बा का जिसे ‘दीन दयालु कोच’ भी कहा जाता है। सबसे ज्यादा जो समस्या होती है वो इसी कोच में होती है। कोच की जितनी क्षमता होती है मतलब जितने लोगों की सीट पर बैठने की व्यवस्था होती है उससे ज्यादा लोग इसमें पाए जाते हैं। कई बार भीड़ ज्यादा हो तो लोग गेट पर बैठ के और लटक के भी यात्रा कर लेते हैं। सरकार जब भी बजट लाती है तो इसे छोड़ ए.सी, स्लीपर से बुलेट ट्रेन तक की बात हो जाती है लेकिन इसकी नहीं। अब Railway जनरल डब्बे की समस्या के लिए एक काम करने जा रही है। ऑफिसों और कॉलेज वगैरह में वो मशीन देखे होंगे जिस पर उंगली लगाकर अटेंडेंस होती है वही अब जनरल डब्बे में लगने जा रहा है।

सरकार अब जल्द ही ट्रेनों के जनरल डब्बे में बायोमेट्रिक सिस्टम की व्यवस्था करने जा रही थी। इससे इस डब्बे में पहले आओ और पहले पाओ की व्यवस्था होने की संभावना है। हाल ही में मुंबई से लखनऊ के बीच चलने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमेट्रिक सिस्टम की टेस्टिंग की गई थी।

ट्रेन के साथ-साथ प्लेटफॉर्म पर भी बायोमेट्रिक लगाने की बात कही गई है-

इस टेस्टिंग के दौरान इसे काफी सही पाया गया है। इसमें यह बात भी कही गई है कि बायोमेट्रिक सिस्टम ट्रेन के अंदर ही नहीं प्लेटफॉर्म पर भी लगाया जाए जिससे यात्री प्लेटफॉर्म से ही ट्रेन में अपनी सीट पक्की कर लें। इस व्यवस्था से भीड़ और ट्रेन के लेट होने के समय पर यात्री हड़बड़ी में नहीं रहेगा क्योंकि बायोमेट्रिक से उसकी सीट रिजर्व हो चुकी होगी। साथ ही जनरल में होने वाली अतिरिक्त भीड़ से निजात मिलने की संभावना भी व्यक्त की गई है।

रिश्वतखोरी रोकने की संभावना-

पुष्पक एक्सप्रेस की टेस्टिंग के बाद इसे जल्द ही इसे अधिकतर ट्रेनों और स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लागू किया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से भी इस कदम को सराहा जा रहा है। रेल्वे रिश्वत की समस्या से भी निपटने की लिए इस बायोमेट्रिक सिस्टम को जल्द ही लागू करने की तैयारी में है। आमतौर पर लोग रिजर्वेशन ना होने पर स्लीपर कोच में रिश्वत देकर सीट ले लेते हैं। दिक्कत होती है जनरल डब्बे में। ऐसे में Railway का ये सिस्टम कितना और कब कारगर होता है ये देखने लायक होगा।