अब विदेशों में नहीं बिकेंगी भारतीय दवाइयां, यूके की एजेंसी ने जताया विरोध होगा भारी नुक्सान

New Delhi: हाल ही में भारत में सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारत में करीब 300 से अधिक दवाइयों को बैन किया था। वहीं अब यूके में भी एजेंसियों ने भारती दवाइयों को लेकर विरोध किया है और अब से यूके में भारतीय कंपनियों की दवाइयां नहीं बिकेंगी। ऐसा कहा जा रहा है कि, कुछ दवाइयों में गलत तत्व पाए गए हैं जिसको लेकर अब यह कदम उठाया गया। 

गौरतलब है कि, केंद्र की मोदी सरकार ने भारत में बिक रही एंटीबायोटिक्स दवाइयों की बिक्री पर बैन लगा दिया था जिसके बाद से दवाई कंपनियों को जोर का झटका लगा था। वहीं अब नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय एजेंसी डीआरआई ने हाल ही में ब्रिटेन, यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों के लिए निर्धारित डायजेपाम, ट्रामडोल जैसी शक्तिशाली दवाओं की 350,000 टैबलेट जब्त की है।  इस घटना के बाद भारतियों दवाई कंपनियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है और अब से कोई भी दवाएं यूके और ब्रिटेन में नहीं बिकेगी। अधिकारीयों का कहना है कि, जब हम अपने वैश्विक भागीदारों के साथ काम करते हैं तो हम अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और अभियोजन पक्ष के माध्यम से आपराधिक गतिविधियों को बाधित करने में सक्षम होते हैं। हम ब्रिटेन में लाइसेंस रहित दवाओं को लाने में शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए अथक रूप से काम कर रहे हैं। भारत जैसे प्रमुख भागीदारों के साथ हमारे सहयोगी प्रयास ब्रिटेन के नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा में मदद करेंगे।  ऐसे में अब इस कड़े एक्शन के बाद भारत को कॉफिन नुकसान पहुंचेगा और जो दवाई के कारोबार में शामिल हैं उनके लिए यह खबर बेहद दुखदाई साबित होगी।

 

जब दवाइयों के मुद्दे के आसपास सहयोग करने की बात आती है तो यूके और भारत का एक लंबा रिश्ता है। 2015 में दोनों देशों ने दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

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