प्रचंड बहुमत की मोदी सरकार, क्या सेना की जरूरतों को करेगी मुमकिन?

New Delhi

आम चुनाव2019 के परिणाम सामने आ चुके हैं। भाजपा ने प्रंचड़ बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार केंद्र की सत्ता हासिल की है। चुनाव प्रचार में भाजपा ने राष्ट्रवाद को प्रमुख मुद्दा बनाया था। चुनावी समर में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान पर बालाकोट हमला और एयर स्ट्राइक पर भारतीय सेना की तारीफ की थी। जिसका लाभ भाजपा को मिला है।

भाजपा को बहुमत मिल चुका है और अब नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रहीं हैं, तो सेना को उम्मीद है कि लंबे वक्त से अटके प्रोजेक्ट आगे बढ़ेंगे। सेना की ताकत में इजाफा होगा ताकि दुश्मन हमला करने की बात सोच तक न सके।

वायुसेना

तीनों सेनाओं की बात की जाये, तो ये आवश्यक युद्ध सामग्री की कमी से जूझ रहीं हैं। भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी जरूरत अभी फाइटर प्लेन है। वायुसेना के पास 31 स्कवॉड्रन हैं, जिनमें मिग-21 का स्क्वॉड्रन सबसे अधिक है। मिग-21 काफी पुराने जहाज है। यह साठ के दशक में आए थे।

वायुसेना प्रमुख वीएस धनोआ ने कहा है कि वायुसेना में 42 स्क्वॉड्रन की संख्या स्वीकृत है। वह भी वर्तमान जरूरतों के हिसाब से कम है। धनोआ ने कहा कि चीन के पास 1700एयरक्राफ्ट है, जिसमें 800 फोर्थ जनरेशन के हैं। वहीं पाकिस्तान ने भी F-16 विमानों के फ्लीट को अपग्रेड किया है। इसके अलावा पाकिस्तान JF17 विमान को भी शामिल कर रहा है।

वायुसेना के अधिकारी का कहना है कि राफेल के आने से वायुसेना की ताकत में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने बताया कि 114 फाइटर जेट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है बस उसका क्लियरेंस मिलना बाकी है। वायुसेना को नई सरकार से उम्मीद है कि यह क्लियरेंस जल्द मिल जाएगी। इन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर वायुसेना की क्षमता में वृद्धि होगी।

भारतीय आर्मी

पिछले साल कैग की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय आर्मी गोला-बारूद से जूझ रही है। सेना का खुल कर समर्थन करने वाली भाजपा सरकार से उम्मीद है कि कार्बाइन की खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी। सालों से अटके फ्यूचकर इंफ्रेंट्री कॉम्बेट वीइकल और फ्यूचर रेडी कॉम्बेट वीइकल प्रोजेक्ट के फिर से शुरू होने की संभावना है।

हालांकि आर्मी खुद में सांगठनिक बदलाव कर रही है। इस संबंध में एक प्रस्ताव कैबिनेट से पास होना है। उम्मीद है नई सरकार की कैबिनेट बैठक में जल्द से जल्द इस प्रस्ताव को पास कर दिया जायेगा।

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