जीएसपी कार्यक्रम से हटाने पर भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- जनकल्याण से समझौता नहीं

नई दिल्ली : जीएसपी कार्यक्रम सूची से भारत का नाम वापस लेने के अमेरिकी निर्णय पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वाणिज्य सचिव अनूप वाधवन ने कहा कि अमेरिका को हमारे विकास और लोक कल्याणकारी हितों के प्रति सचेत रहना होगा। हमारा प्रयास था कि जनकल्याण से समझौता किए बिना चिकित्सा उपकरणों की सस्ती कीमतों को संतुलित किया जाए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हमारे बहुत गहरे संबंध हैं। व्यापार डोमेन के सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। हम चिकित्सा उपकरणों के सामर्थ्य पर कोई समझौता नहीं करेंगे। जीएसपी लाभों का आर्थिक मूल्य बहुत मध्यम है।वाधवन ने कहा कि हमारा आकलन है कि इससे अमेरिका के 5.6 बिलियन डॉलर के निर्यात पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइट हाइज़र ने मंगलवार को घोषणा की थी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिका, भारत और तुर्की लाभकारी विकासशील देशों को सामान्यीकृत तरजीही प्रणाली के तहत वरीयता प्राप्त (GSP) कार्यक्रम को समाप्त करना चाहता है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने ट्रम्प के हवाले से कहा कि उन्होंने निर्धारित किया था कि नई दिल्ली ने अमेरिका को आश्वासन नहीं दिया था कि वह भारत के बाजारों में न्यायसंगत और उचित पहुंच प्रदान करेगा। ट्रम्प की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में उन्होंने कहा कि जीएसपी पात्रता मानदंड के अनुसार मैं यह आकलन करना जारी रखूंगा कि क्या भारत सरकार अपने बाजारों में समान और उचित पहुंच प्रदान कर रही है।

बता दें कि सामान्यीकृत तरजीही प्रणाली (जीएसपी) विकासशील देशों को तरजीही शुल्क पर व्यापार करने के लिये विकसित देशों द्वारा शुरू किया गया प्रोग्राम है। साल 2017- 18 में भारत से अमेरिका को 47.9 अरब डालर का निर्यात किया गया जबकि आयात 26.7 अरब डालर रहा है। ट्रम्प ने जीएसपी कार्यक्रम सूची से भारत का नाम वापस लेने का फैसला किया है।

इनपुट – ANI