सेना का वो जवान जिसने अकेले ही मा’र गि’राए PAK के 15 सैनिक, फिर शही’द हो गया

New Delhi :  आइए आज एक ऐसे ही बहादुर फौजी के बारे में जानते हैं, जिनके नेतृत्व में महज दो घंटे में ही पाकिस्तान के 22 सैनिकों को मा’र गि’राया और घुस’पैठियों को भाग खड़ा होने पर मजबूर कर डाला। इस बहादुर फौजी बेटे का नाम है सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी।

करगिल युद्ध 1999 में भारतीय सेना ने घुस’पैठियों को खदेडऩे और पाक को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन विजय शुरू कर रखा था। युद्ध में सेना की अन्य बटालियनों के साथ सूबेदार हरफूल की 17 जाट रेजिमेंट भी आ’परेशन विजय में सम्मिलित थी। इसे द्रास सेक्टर में घुस’पैठियों को खदे’डऩे का जिम्मा दिया था। उच्च अधिकारियों के आदेश पर 29 मई 1999 को सूबेदार हरफूल 17 जाट रेजिमेंट की टुकड़ी के 38 सैनिकों का नेतृत्व करते हुए मश्कोह घाटी के प्वाइंट 4590 चोटी पर क’ब्जा करने के लिए आगे बढ़े।

टुकड़ी की 2 घंटे तक पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मुठभे’ड़ हुई, जिसमें 15 पाकिस्तानी सैनिक मा’रे गए। भारतीय सेना का बिना किसी नु’कसान के चोटी पर नियंत्रण हो गया।योजना के अनुसार सूबेदार हरफूल सिंह और उनकी टुकड़ी ने श’त्रु की दूसरी चौकी की ओर बढऩा आरम्भ किया। रात के अँधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सुबह लगभग 4 बजे उन्हें पता चला कि वे श’त्रु के काफी निकट पहुंच गए हैं। जब वे श’त्रु की बंकर से 100 मीटर की दूरी पर थे। श’त्रु ने घा’त लगाकर अचानक अं’धा-धुं’ध फा’यरिंग शुरू कर दी।गो’लियों की ग’डगड़़ाहट के बीच हरफूल सिंह की टुकड़ी श’त्रुओं पर टूट पडी। कई दु’श्मन ढे’र हो गए। इसी बीच हरफूल सिंह के एक साथी को एक गो’ली लगी और वह श’हीद हो गया। इस हमले में एक गो’ली हरफूल सिंह के बांह में भी ल’गी पर इसकी परवाह नहीं की। अपने साथी रणवीर सिंह को हता’हत होते देख हरफूल सिंह श’त्रु पर क’हर बनकर टू’ट पड़े।

देखते ही देखते उन्होंने श’त्रु के दो बं’कर उ’ड़ा दिए। अपने साथियों के साथ उन्होंने 22 श’त्रु सैनिकों को मौ’त के घाट उतार दिया। इसी बीच भारतीय टुकड़ी की यु’द्ध सामग्री समाप्त हो गई। पीछे से अन्य साथी सामग्री लेकर नहीं पहुंचने से हरफूल सिंह श’त्रुओं से घिर गए। दो गो’लियां उनके मा’थे पर लगी और तीन सीने पर। हरफूल सिंह अपने अन्य पांच साथियों के साथ श’हीद हो गए। श’हीद सूबेदार हरफूल सिंह का श’व खऱाब मौसम के कारण तुरंत नहीं प्राप्त हो सका था। 30 मई को श’हीद होने के 46 दिन बाद 14 जुलाई 1999 को अन्य भारतीय सैनिकों के साथ 15 फीट गहरी बर्फ में दबा हुआ मिला।

सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी का जन्म 2 जून 1952 को झुंझुनूं जिले के गांव तिलोका का बास में भागीरथ मल कुलहरी के घर में माता झूमा देवी की कोख से हुआ।राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोलिंडा में आठवीं तक की पढ़ाई की। 10 मई 1968 को जीत की ढाणी की सुकनी देवी से शादी हुई। 4 अगस्त 1971 को सेना में भर्ती हुए। इससे पहले दो साल तक आसाम में नौकरी की। भारत-पाक युद्ध 1971 के समय हरफूल सिंह जम्मू कश्मीर में तैनात थे। इस युद्ध में इन्होंने बहादुरी का परिचय दिया।15 मा’र्च 1989 को नायब सूबेदार की रैंक में पदोन्नत हुए। 1993 में सूबेदार के रैंक में कमीशन मिला। सिपाही से सूबेदार बने हरफूल ने 28 वर्ष की सेवा में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए थे।