कैप्टर धर्मवीर सिंह: भारत का वो जवान जो 4000 पाकिस्तानी सैनिकों के सामने शेर की तरह लड़ा

New Delhi : रात के सन्नाटे को चीरती हवा के बीच राजस्थान में पाक बॉर्डर पर आती टैंक चलने की घर्र-घर्र आवाज। यह भारतीय जवानों को इस बात का आभास कराने के लिए काफी था कि दुश्मन ने आंख उठाने की हिमाकत की है। 4 दिसंबर 1971 की रात में पाकिस्तान की सेना ने भारत के जैसलमेर इलाके में दस्तक दी। पाकिस्तान की एक टैंक रेजिमेंट व तीन पैदल सैनिक बटालियन ने रात्रि में लोंगेवाला पर आक्रमण किया।

उस समय जैसलमेर में 120 जवानों के साथ मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी कमान थामे हुए थे। कैप्टन धर्मवीर ने दुश्मन के टैंकों की आवाज सुनने के बाद चांदपुरी को सूचना दी। इधर पाकिस्तान ने ताबड़तोड़ गोलीबाड़ी शुरू कर दी। इस पर देश के जवानों ने उन टैंकों को नेस्तनाबूद कर दिया।

पाकिस्तान ने पूरी आर्म्ड रेजिमेंट व दो इंफेंट्री स्क्वाड्रन के साथ धावा बोलने का दुस्साहस किया था। रात भर की जंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के अचूक निशानों से लोंगेवाला को पाकिस्तानी टैंकों की कब्रगाह बना डाला और देखते ही देखते पाकिस्तान के करीब 40 टैंक वहां दफन हो गए।

इस युद्ध के दौरान पाक सेना ने जैसलमेर के लोंगेवाला को कब्जे में लेने की योजना बनाई थी। दुश्मन लोंगेवाला के रास्ते जैसलमेर, जोधपुर पर कब्जा जमाने की योजना बना रहा था, लेकिन रणबांकुरों ने लोंगेवाला में ही दुश्मन देश के दांत खट्टे कर दिए।

दुश्मन का क्या था इरादा…? राजस्थान के लोंगेवाला सीमा पर 4 दिसंबर की रात में पाकिस्तान ने पूरी प्लानिंग से हमला किया। दुश्मन का संकल्प था जैसलमेर में नाश्ता, जोधपुर में दोपहर का भोजन और रात्रि का भोज दिल्ली में। दरअसल पाकिस्तान के ब्रिगेडियर तारिक मीर ने अपनी योजना पर विश्वास प्रकट करते हुए कहा था कि इंशाअल्लाह हम नाश्ता लोंगेवाला में करेंगे, दोपहर का खाना रामगढ़ में खाएंगे औऱ रात का खाना जैसलमेर में होगा। उनकी हिसाब से सारा खेल एक ही दिन में खत्म होना था।

120 जवानों ने पाकिस्तान के 3000 फौजियों को चटाई थी धूल :  उस समय पंजाब रेजीमेंट के केवल 120 भारतीय जवान वहां तैनात थे। सामने था दुश्मन की 4000 फौजियों का दल। फिर भी भारतीय जवानों ने हार नहीं मानी और जान पर खेलकर देश के लिए लड़े और छोटी सी टोली ने दुश्मन को धूल चटा दी।

क्या था पाकिस्तान का मकसद…? इस युद्ध के पीछे पाकिस्तान का मुख्य मकसद था भारतीय सीमा का पूर्वी हिस्सा। दरअसल पाकिस्तान ने युद्ध का यह कदम इसलिए उठाया था ताकि राजस्थान के इस इलाके पर कब्जा करके भारत-सरकार को पूर्वी सीमा (बांग्ला देश सीमा) पर समझौते के लिए मजबूर कर दिया जाए।