दुश्मन पर कहर बरपाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात करेगा भारत

Brahmos Missile

New Delhi: रडार के पहुंच से दूर और ध्वनि के गति से भी तेज चलने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने में कई देशों ने रूची दिखाई है। भारत इसी साल स्वदेशी मिसाइल के निर्यात का काम शुरू कर सकता है। सिंगापुर में चल रहे IMDX ASIA एग्जिबिशन 2019 के दौरान ब्रह्मोस एयरोस्पेस के चीफ जनरल मैनेजर (एचआर) कमोडोर एसके. अय्यर ने यह जानकारी दी। अय्यर ने कहा कि कंपनी ने अपनी तरफ से तमाम तैयारियां कर ली हैं, सिर्फ सरकार की मंजूरी का इंतजार है।

कमोडोर अय्यर के मुताबिक, “भारत की मिसाइलों को खरीदने में सबसे ज्यादा रुचि दक्षिण पूर्वी और खाड़ी देशों ने दिखाई है। उन्होंने कहा कि मिसाइल बिक्री के लिए पहला बैच तैयार है और हम सरकार की तरफ से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। खाड़ी देशों ने तो हमारी मिसाइलों में काफी रुचि दिखाई है।

क्यों खास है ब्रह्मोस  

ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। यह रडार को चकमा दे सकने वाला एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक अर्थात ध्वनि के गति से भी तेज मिसाइल माना जाता है, जिसकी रफ्तार 2.8 मैक है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है।

सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट से भी परीक्षण किया जा चुका है। फाइटर जेट से मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल के इस परीक्षण को ‘डेडली कॉम्बिनेशन’ कहा जाता है। ब्रह्मोस का पहला सफल परीक्षण 12 जून, 2001 को हुआ था।

IMDX ASIA  एग्जिबिशन 2019 में विश्व की कुल की 236 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। दुनियाभर से करीब 10,500 कंपनी प्रतिनिधि यहां आए हुए हैं। 30 देशों के युद्धपोत भी प्रदर्शनी में शामिल किए गए है।

 

Rajat Kumar

Trainee Copy Editor at Live India
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत-ए-हाल बदलनी चाहिए।
Rajat Kumar