जहां भारत के जवानों ने दिखाई थी PAK को उसकी औकात, देखिए आज कैसी दिखती है वो जगह

New Delhi : शायद आपको जानकारी हो कि 1971 की भारत पाकिस्तान लड़ाई का मुख्य फोकस था सीमा का पूर्वी हिस्सा । पश्चिमी हिस्से की निगरानी सिर्फ इसलिए की जा रही थी ताकि याहया खान के नेतृत्व में लड़ रही पाकिस्तानी सेना इस इलाके पर कब्जा करके भारत सरकार को पूर्वी सीमा पर समझौते के लिए मजबूर ना कर दे ।

पाकिस्तान ने पंजाब और राजस्थान के इलाकों में अपने जासूस फैला रखे थे । उनकी योजना किशनगढ़ और रामगढ़ की ओर से राजस्थान में घुसपैठ करने की थी । पाकिस्तान के ब्रिगेडियर तारिक मीर ने अपनी योजना पर विश्वास जताते हुए कहा था..इंशाअल्लाह हम नाश्ता लोंगेवाला में करेंगे। दोपहर का खाना रामगढ़ में खाएंगे और रात का खाना जैसलमेर में होगा। यानी उनकी नजर में सारा खेल एक ही दिन में खत्म हो जाना था।

पांच दिसंबर की सुबह लेफ्टिनेन्ट धरमवीर को गश्त के दौरान सीमा पर घरघराहट की आवाजें सुनाई दीं । जल्दी ही इस बात की पुष्टि हो गई कि पाकिस्तानी सेना अपने टैंकों के साथ लोंगेवाला पोस्ट की तरफ बढ़ रही है । फौरन मेजर चांदपुरी ने बटालियन के मुख्यालय से संपर्क करके हथियार और फौजियों की टोली को भेजने का निवेदन किया । इस समय तक लोंगेवाला पोस्ट पर ज्यादा हथियार नहीं थे । मुख्यालय से निर्देश मिला कि जब तक मुमकिन हो भारतीय फौजी डटे रहें। पाकिस्तानी सेना को आगे ना बढ़ने दिया जाए । मदद भेजी जा रही है। संख्या और हथियारों में पीछे होने के बावजूद भारतीय सिपाहियों ने हिम्मत नहीं हारी। सवेरा हो गया, लेकिन पाकिस्तानी सेना लोंगेवाल पोस्ट पर कब्जा नहीं कर सकी ।

4 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने लोंगेवाला में एक इन्फैन्ट्री ब्रिगेड टी-59 टैंकों की एक रेजिमेंट और एम-4 शरमेन टैंक के एक स्क्वाड्रन शामिल थे। लोंगेवाला पर कब्जा करने के बाद, योजना अनुसार रामगढ़ और जैसलमेर की ओर बढ़ना था। मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में 23 पंजाब बटालियन की अल्फा कंपनी लोंगेवाला में तैनात थी। योजना के अनुसार 4 व 5 दिसंबर 1971 को लोंगेवाला पोस्ट पर हमला किया गया था। दुश्मन सेना और टैंक की भारी संख्या में होने के बावजूद अल्फा कंपनी के बहादुर सैनिकों ने अपने पोस्ट पर रहकर लड़ाई करने का फैसला किया। 5 दिसंबर 1971 की सुबह विंग कमांडर एमएस बावा के नेतृत्व में जैसलमेर में स्थित भारतीय वायुसेना के हंटर एयरक्राफ्ट से हवाई हमला किया और कई पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया। आज लोंगेवाला में युद्ध स्मारक बना हुआ है। रेत की टीलों से घिरे लोंगेवाला तक एक सिंगल सड़क जाती है। यहां आप अमृतसर या पंजाब राजस्थान के जिन इलाकों से चाहें पहुंच सकते हैं।