हरियाणा में अब नहीं मरती गर्भ में बेटियां, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान से हुआ ये बदलाव

देश की राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा में लिंगानुपात दर में सुधार हुआ है और यह 1000 लड़कों पर 933 लड़कियों तक पहुँच गया है। इस बात की जानकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार रात ट्वीट के माध्यम से दी। खट्टर की माने तो यह बदलाव भाजपा सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के सही क्रियान्वयन से हुआ है।

हरियाणा के सीएम खट्टर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “जब हमने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान चलाया तब प्रदेश में लिंगानुपात की संख्या 1000 लड़कों पर मात्र 871 लड़कियां थी लेकिन हमने समाज, संस्थाओं, सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए आज 933 के आंकड़े तक पहुंच गए हैं। यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है।”

इसके अलावा खट्टर ने बुधवार को एक और ट्वीट किया। इसमें खट्टर ने आगे लिखा, “आज 1000 लड़कों पर पहले की तुलना में 52 लड़कियां बड़ गईं हैं और अगर साढ़े 4 वर्षों का हिसाब लगाया जाये तो 40 हजार बेटियां जो गर्भ में ही मर जाती थी वो सुरक्षित इस संसार में आई हैं, हमने सामाजिक समस्याओं पर ध्यान दिया , ये उसी का परिणाम है।

 

बता दें कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी ने 22 जनवरी 2015 में की थी। इस अभियान की शुरूआत महिला एंव बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ सयुंक्त रूप से की गयी थी। इसका उद्देश्य लड़कियों के लिए जागरूकता लाना और कल्याणकारी सेवाओं की दक्षता में सुधार करना है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार इस अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों में बाल लिंगानुपात की स्थिति में सुधार करना चाहती थी।