भारत के इन मंदिरों में होती है असुरों की पूजा, जानें क्या है इसके पीछे की मान्यता

आज तक आपने बहुत से मंदिरों के बारे में सुना और पढ़ा होगा लेकिन आज हम आपको ऐसे अनोखे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर भगवानों की नहीं बल्कि असुरों की पूजा की जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला असुरों की पूजा क्यों की जाती है तो आपको बता दें कि इसके पीछे भी लोगों में कुछ मान्यताएं हैं तो चलिए जानते हैं कि कहां स्थित हैं भारत के ऐसे अनोखे मंदिर और क्यों की जाती है इनमें असुरों की पूजा-

पूतना का मंदिर-

पूतना राक्षसी को तो आप जानते ही होंगे इन्होंने कृष्ण को दूध पिलाने के बहाने उनको मा‘रने की कोशिश की थी। पूतना का मंदिर उत्तरप्रदेश के गोकुल में है इस मंदिर में उनकी लेटी हुई मूर्ति लगी है और बालक रूप में श्रीकृष्ण पूतना की छाती पर चढ़कर उसका दूध पी रहे हैं। इस मंदिर में पूतना की पूजा किए जाने के पीछे लोगों में ऐसी मान्यता है कि भले ही पूतना ने मारने के लिए ही सही लिए ही सही लेकिन एक मां का रूप धरकर श्रीकृष्ण को अपना दूध पिलाया। इसलिए मां के रूप में ही पूतना की यहां पर पूजा की जाती है।

दशानन मंदिर-

रावण का ये मंदिर उत्तरप्रदेश के ही कानपुर में स्थित है। ये कानपुर में शिवाला इलाके में है। इस मंदिर के निर्माण को लेकर मान्यता है कि इसका निर्माण 1890 में हुआ था। ये तो आप सभी जानते हैं कि बुराई की राह पर चलने वाला रावण कितना ज्ञानी और महान पंडित था। इस मंदिर की खास बात ये है कि ये साल में सिर्फ एक दिन के लिए ही खुलता है दशहरे के दिन। दशानन की मूर्ति को नहाने और उनका श्रृंगार करने के बाद उनकी आरती की जाती है और आरती संपन्न होने के बाद दोपहर को मंदिर बंद कर दिया जाता है और फिर अगले साल दशहरे पर ही ये मंदिर खुलता है।

दुर्योधन का मंदिर-

महाभारत के विलेन दुर्याधन को भला कौन भूल सकता है। उसकी वजह से बहुत से मासूमों को मौ‘त के घाट उतरना पड़ा। ये मंदिर उत्तराखंड की नेटवार नामी की जगह से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन यहां पर लोग दुर्योधन की ना सिर्फ पूजा करते हैं बल्कि उनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। ये मंदिर बहुत ही बड़ा है। इसी मंदिर से कुछ दूरी पर दुर्योधन के सबसे प्रिय मित्र कर्ण का भी मंदिर है।