2018-19 में एक तिहाई फूड आइटम्स मिलावटी पाए गए, इस मामले में यूपी और तमिलनाडु टॉप पर

नई दिल्लीः हम सभी अक्सर अपने खाने के स्वाद को लेकर तो चिंतित रहते हैं लेकिन वो कितना सुरक्षित है इस बात को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आप भी अब तक ऐसा ही करते थे तो आपको थोड़ा सावधान होने की जरूरत है क्योंकि सरकारी आंकड़ें खाने की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक स्थिति को उजागर करते हैं। 2018 से 2019 के बीच में लिए गए खाने के सैम्पल में पता चला कि खाना मिलावटी है या फिर घटिया किस्म का है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लिए गए सैम्पल में एक तिहाई खाद्य पदार्थ मिलावटी पाए गए।

सरकारी आंकड़ों की माने तो इस सूची में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु सबसे ऊपर हैं जहां पर आधे से ज्यादा सैम्पल टेस्ट में फेल हुए। बीते दो सालों में फेल हुए सैम्पल का आंकड़ा लगभग 25 प्रतिशत का है। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने अपने एक लिखित जवाब में मंगलवार को लोकसभा में कहा कि 2016 से 2017 और 2018 से 2019 के बीच में लगभग 8,100 लोगों को ऐसा अपराध करने के लिए अपराधी ठहराया गया। ऐसे अपराधों के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सभी राज्यों में अपराधियों से लगभग 43.65 करोड़ रुपये की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े राज्ये सरकारों से लिए गए हैं। ये सभी टेस्ट खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI के द्वारा तय किए गए मापदंडों पर किए गए।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कुल 65,000 टेस्ट में से 20,000 से ज्यादा सैम्पल 2018-2019 के दौरान फेल हुए। 2017-18 के दौरान 99,000 में से 24,000 सैम्पल मानकों के अनुरूप नहीं थे और 2016-17 के दौरान 78,000 सैम्पल में से 18,000 से ज्यादा सैम्पल फेल हुए। खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण बिल भी पेश किया जो कि इस तरह के अपराधों के लिए क‘ठोर जु‘र्माने और यहां तक की का‘रावास का भी आदेश देता है।