प्रेरणा है तो जीवन में गति है और गति है तो ही जीवन है!

जीवन में प्रेरणा का क्या मोल है? लोग अकसर ये मानके चलते हैं कि उन्हें जीवन में भला प्रेरणा की क्या जरूरत है लेकिन ये प्रेरणा ही तो है जो हमे जीवन भर चलाती है। किसी को पेट भरने की प्रेरणा है तो किसी को महंगी कार खरीदने की प्रेरणा। हर व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग चीजें प्रेरणा के स्त्रोत के रूप में कार्य करती हैं। लेकिन व्यक्ति के सामने कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आती हैं जब उसकी ये प्रेरणाएं उसे आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं होती हैं तब उसे जीवन को समझने वाली प्रेरणाओं की जरूरत होती हैं। आज हम आपको ऐसी ही आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानंद की प्रेरणाओं से परिचित कराने जा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं उनके विचार-

1.अगर आप दुखी होना चाहते हैं, तो दुनिया में कोई भी आपको खुश नहीं कर सकता। लेकिन अगर आप खुश रहने का मन बना लें तो इस पृथ्वी पर कोई भी और कुछ भी आपसे वो खुशी नहीं छीन सकता।

2 .अगर आपका मन मजबूत है और आप उसमे एक दृढ संकल्प स्थापित कर देते हैं तो आप अपना भाग्य बदल सकते हैं।

3 .केवल अपने हृदय की खुशी आत्मा को संतुष्ट नहीं कर सकतीय हमें अपनी ही खुशी के लिए कोशिश करनी चाहिए कि हम उसमे दूसरों की खुशी भी शामिल कर सकें।

4.इस क्षण में शांति से जियो और अपने समक्ष मौजूद सुन्दरता को देखो। भविष्य खुद अपना खयाल रख लेगा।

5.जितना सिम्पल रह सकते हैं रहें आप यह देखकर अचंभित हो जायेंगे कि आपकी लाइफ कितनी सरल और प्रसन्न हो सकती है।

6.आपके हृदय के अन्दर एक चुम्बक है जो सच्चे दोस्तों को आकर्षित करेगा। वो चुम्बक है निस्वार्थता, दूसरों के बारे में पहले सोचना जब आप दूसरों के लिए जीना सीख लेते हैं तो वे आपके लिए जीने लगते हैं।

7.अधूरी इच्छाओं की शक्ति सभी मनुष्य के गुलामी की जड़ है।

8.असफलता का मौसम सफलता के बीज बोने के लिए सबसे अच्छा समय है।

9. मन की शांति के बिना बहुत सारे पैसे होना समुद्र में नहाते हुए प्यास से मरने के समान है।

10.आप जितनी बार भी फेल होते हैं, उठिए और फिर से प्रयास करिए। जब तक आप भगवान को निराश नहीं करते, और प्रयत्न करते रहते हैं वो आपको निराश नहीं करेंगे।