जनकपुर के हर घर मेें मिलती है मधुबनी पेंटिंग की छाप

NEW DELHI :MADHUBANI PAINTINGS खासकर बिहार के MADHUBANI,DARBHANGA,SITAMARHI और नेपाल के JANAKPUR ,SIRHA और  DHANUSHA जिलों में देखने को मिलती है । शुरु-शुरु में मधुबनी पेंटिंग बिहार के गांवों मे मिट्टी  के बने घरों के चारदीवारियों पर मिला करते थे, जिसमें मिट्टी की  दिवारों पर घर की औरतें तरह-तरह की मनमोहक तस्वीरें जिसमें कार्टून ,सुन्दर फूलों इत्यादि को बनाती थी लेकिन धीरे-धीरे यह पक्की घरों की दिवारों और आंगनों में भी बनाया जाने लगा।आज के समय में यह कपड़ों ,कागजों ,कार्योलयों औऱ रेलवे स्टेशनों पर व्याप्क स्तर पर बनाया जा रहा है । दरभंगा और सीवान बिहार के दो ऐसे स्टेशन है जहाँ आप मधुबनी पेंटिंग की झाखींया देख सकते है ।  बिहार से चलने वाली BIHAR SAMPARK KRANTI EXPRESS,JANSADHARAN EXPRESS और RAJDHANI EXPRESS की डिब्बों की पेंटिंग मधुबनी शैली  में की गई है । इसकी प्रशंसा केवल भारत ही नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र समेत विश्वभर के देशों ने की लेकिन क्या आप जानते है कि मधुबनी पेंटिंग की शुरुआत कैसे हुई? आइए इसी की पड़ताल करते हैं– मधुबनी चित्रकला की शुरुआत रामायण काल से ही मानी जाती है । ऐसा कहा जाता है कि जब मिथिला नरेश राजा जनक की उपस्थिती में राम ने शिव धनुष  तोड़ दिया तो उसके बाद सीता की शादी  राम से करने की तारीख  तय हुई। अब अयोध्या से बारात आने वाली  थी।  इस पर राजा जनक ने अपनी लाडली बिटियां सीता को यादगार बिदाई देनी की सोची । उन्होनें सारे मिथिलावासियों को आदेश दिया कि वे अपने घरों की दिवारों औऱ आंगनो पर पेंटिंग बनाए ,जिसमें उनकी संस्कृति झलके ,जिससे अयोध्या से आए बारातीयों को मिथिला की संस्कृति का पता चल सके । इसके बाद सारे गांव में पेंटिंग बनाई गई जो काफी लोकप्रिय हुआ ।यहीं से मधुबनी पेंटिंग की शुरुआत मानी जाती है ।मधुबनी पेंटिंग की विशेषताएं-

  • मधुबनी पेंटिंग में हिन्दू देवी-देवताओं मां दुर्गा,काली,सीता-राम,राधा-कृष्ण,शिव-पार्वती,गौरी-गणेश और विष्णु के अवतारों की तस्वीर ,प्राकृतिक नजारे जैसे सूर्य व चन्द्रमा,धार्मिक पेड़-पौधों जैसे की तुलसी,पीपल आदि और विवाह के दृश्य देखने को मिलते है। इसके अतिरिक्त हाथी और मछली को रंगोली के माध्यम से दर्शाया गया होता है ।
  • मधुबनी पेंटिंग में चटकीले रंगों जैसे की गहरा लाल रंग,नीला,हरा और काला रंग का इस्तेमाल बखूबी किया जाता है।सबसे खास बात यह है कि इन रंगों को घरेलू चीजों से ही बनाया जाता है ।पेंटिंग बनाने के लिए माचिस की तीली व बाँस की कलम को भी प्रयोग में लाया जाता है । रंग बनाते समय हल्दी,केले के पत्ते,लाला रंग के लिए पीपल क छाल का प्रयोग किया जाता है। रंग की पकड़ बनाने के लिए बबूल की वृक्ष की गोंद को भी मिलाया जाता है ।