ऑनर किलिंग: यूपी में दलित युवक की हत्या, सदमे से बीमार मां की मौत

New Delhi: आपने मुगल- ए- आजम फिल्म तो देखी होगी जिसमें अकबर अपने बेटे सलीम की महबूबा अनारकली को प्यार करने की सजा देते हुए उसे दो दीवारों के बीच जिंदा ही चुनवा देता है। देखा जाए तो यह ऑनर किलिंग का पहला मामला था। उस घटना को कितना वक्त गुजर गया लेकिन प्यार करना अब भी गुनाह माना जाता है। अब हम जिस घटना की बात यहां करने जा रहे हैं, उसमें बस इतना फर्क है कि महबूबा अनारकली के परिवार वाले उसके प्रेमी सलीम की हत्या कर देते हैं। मुद्दा तो वही है, कथित आत्मसम्मान का, जाति का। लड़के का परिवार दलित है तो वहीं लड़की लोग ओबीसी वाले हैं।

रविवार को दलित मिथिलेश पाल के बेटे अभिशांक पाल (23)की, जिसे प्यार से मोनू बुलाते थे, शिवानी गुप्ता के परिवार के सदस्यों ने हत्या कर दी। मोनू के साथ शिवानी रिलेशनशिप में थी। पुलिस ने मोनू की हत्या को ऑनर किलिंग बताया है। आरोपी राधे गुप्ता को मोनू को एक चारपाई पर बांधकर उसे आग लगाकर मारने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही उसकी पत्नी दाली गुप्ता और बेटी शिवानी को भी हिरासत में लिया गया है।

शनिवार की रात मोनू अस्पताल जा रहा था, जहां उसकी मां रामबेती (56) भर्ती थीं। उसी वक्त शिवानी के पिता और दो लोगों ने उसे पकड़ लिया और चारपाई से बांध दिया और आग लगाकर हत्या कर दी। इस हत्या में दो महिलाओं सहित पांच लोग आरोपी हैं, और तीन को गिरफ्तार किया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, लड़के के चाचा अजय पाल ने बताया कि मोनू को उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसमें उसकी मां थीं। उन्होंने कहा, ”अगर आप उसके चेहरे के कुछ हिस्सों को छोड़ दें, तो उसका पूरा शरीर काला पड़ गया था। वह अभी भी जीवित था और दर्द से कराह रहा था इसलिए हम उसे जिला अस्पताल ले गए जहां रामबेती भर्ती थीं। जब उनको बेटे मोनू के बारे में पता चला, तो उसे दिल का दौरा पड़ा। हम उन्हें लखनऊ ले जा रहे थे लेकिन रास्ते में ही रामबेती की मौत हो गई। घंटों बाद, मोनू को भी लखनऊ रेफर कर दिया गया और उसने भी रास्ते में ही दम तोड़ दिया।”

अजय पाल ने बताया, ”शनिवार को रामबेती की तबियत खराब हो गई थी और उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनको लखनऊ रेफर करने को कहा तो हमने मोनू से कहा कि घर जाकर कुछ कैश लेकर आ जाओ। लेकिन राधे और कुछ लोगों का तो अलग ही प्लान था। जब मोनू सुबह 1 बजे पैसे के साथ घर से लौट रहा था तो राधे और उसके पड़ोसी सत्यम सिंह और उसके भाई शिखर सिंह ने उसे अपने घर के पास रोका। उन्होंने मोनू के साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया। जब मोनू ने उनको रोकने की कोशिश की तो उसे छड़ों से पीटा और एक कमरे में बंद कर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। जब वहां के स्थानीय लोगों ने आवाजें सुनी तो पुलिस को सूचना दी और उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वह 70 फीसदी जल चुका था।

अभिषेक की मौत के बाद दर्ज की गई एफआईआर में यह भी लिखा गया है। इसमें राधे गुप्ता और चार अन्य पर अत्याचार अधिनियम की धाराओं के तहत हत्या, हमला और शांति भंग का मामला दर्ज किया गया है।

वहीं जेल में बंद राधे गुप्ता ने दावा किया कि उसके खुद के बच्चे नहीं हैं और उन्होंने दशकों पहले अपनी भतीजी शिवानी को गोद लिया था। उसने कहा, “मैं गुस्से में था और यह सब कुछ पल भर में हो गया। कभी-कभी एक आदमी को अपनी जाति और परिवार की गरिमा को बचाने के लिए कुछ करना पड़ता है। मैने भी वही किया। मुझे नहीं पता कि मुझे इस पर गर्व करना चाहिए या नहीं।”

वहीं लड़की शिवानी के मुताबिक, जब उसके चाचा और चाची को मोनू के साथ मेरे रिलेशन के बारे में पता चला तो उन्होंने उसको पीटा था। उन्होंने इंटरमीडिएट के बाद उसको पढ़ाई भी नहीं करने दी। शिवानी ने बताया कि शनिवार की रात वह मोनू से मिलना चाहती थी इसलिए उसने उसे घर आने के लिए कहा। चाचा और चाची ने उनको पकड़ लिया ओर मुझे एक कमरे में बंद कर मोनू की हत्या कर दी।

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