अरुण जेटली एक बेजोड़ बुद्धिजीवी नेता थे, उनका निधन देश के लिए अपूर्णीय क्षति है-उपराष्ट्रपति

New Delhi : लंबे अरसे से बीमार देश के पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली का शनिवार दोपहर दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। उनका निधन 12 बजकर 7 मिनट पर हुआ। निधन के बाद पूर देश में शोक का माहौल है। राजनेता ही नहीं उनके प्रति सभी क्षेत्र की जानी मानी हस्तियां दुख व्यक्त कर रही हैं। देश के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना देश के लिए ही नहीं मेरे लिए भी अपूर्णीय क्षति है। मेरे पास अपना दुख व्यक्त करने के लिए इस वक्त शब्द नहीं हैं। वो एक बेजोड़ बुद्धिजीवी नेता थे जो एक योग्य नेता और पवित्र अखंडता के व्यक्ति थे।

अरुण जेटली के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृहमंत्री अमित शाह ,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित कई बड़े नेताओं के शोक जताया है। राष्ट्रपति ने कहा श्री अरुण जेटली के निधन से बहुत दुःखी हूँ। वह अपनी लंबी बीमारी से गरिमा के साथ लड़े। एक शानदार वकील, एक अनुभवी सांसद और एक प्रतिष्ठित मंत्री थे। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में बहुत योगदान दिया।

आपको बता दें 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद, अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि उन्हें नई सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाए क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहते थे।

पेशे से वकील, अरुण जेटली उन नेताओं में से थे, जो आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार में जेल गए थे। वह उस समय छात्र नेता थे। जेल से रिहा होने के बाद, अरुण जेटली जनसंघ के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए और संगठन के रैंकों में उठ गए जो बाद में भाजपा बन गया।

पेशे से वकील अरुण जेटली ने अटल बिहारी वाजपेयी कैबिनेट में भी काम किया। 2009 और 2014 के बीच जब भाजपा विपक्ष की बेंच में बैठी थी अरुण जेटली ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में काम किया।