श’हीद पिता की तेरहवीं पर भर आईं बेटे की आंखें- मासूम के सिर पर लगी पगड़ी ने सबको रुला दिया

NEW DELHI: आ’तंकी ह’मले में श’हीद हुए सीआरपीएफ के जवान सतेंद्र की तेरहवीं पर हरियाणा के किवाना गांव में सैकड़ों लोग जुटे। खेलने कू’दने की उम्र में सतेंद्र के बेटे दीपांशु के सिर पर जिम्मेदारी की पगड़ी बंधी, तो माहौल गमगीन हो गया। हर शख्स भावुक हो गया।

तेरहवीं में शामिल होने के लिए सुबह से ही लोग पहुंचने लगे थे। किवाना के प्राइमरी स्कूल में गुरुवार को रस्म तेरहवीं हुई। विशाल पंडाल में प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर आए गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा, कई विधायक, जनप्रतिनिधि समेत हजारों लोग मौजूद थे। शहीद सतेंद्र का साढ़े चार साल का बड़ा पुत्र दीपांशु अपने चाचा केशव की गोद में बैठा था। मंत्रोच्चार शुरू होने पर दीपांशु नहीं समझ पा रहा था कि आखिर क्या हो रहा है। कुछ देर बाद पगड़ी की रस्म शुरू हुई। जैसे ही दीपांशु के सिर पर पगड़ी बंधी तो उसने सिर पर हाथ लगाकर देखा। वो कभी अपने चाचा तो कभी पास में बैठे बाबा की तरफ देखने लगा। शायद उसके मन में कुछ सवाल थे, जिनका वो जवाब चाहता था। चार साल की खेलने कूदने की उम्र में इस मासूम के सिर पर जिम्मेदारी की पगड़ी देख हर शख्स भावुक हो गया।

सतेंद्र की तेरहवीं में परिवार और समाज के लोगों ने एक अच्छी मिसाल भी पेश की। आपसी सलाह से पगड़ी में केवल एक रुपया ही लिया गया। पंडाल में पहले ही घोषणा कर दी गई कि कोई भी व्यक्ति पगड़ी में एक रुपये से ज्यादा ना दे।

तेरहवीं में शामिल होने आए सीआरपीएफ के कमांडेंट सतेंद्र कुमार ने कहा कि सतेंद्र एक हीरे जैसा था। उसमें देशभक्ति का जज्बा कूटकूटकर भरा था। हमेशा जोशीली बातें करता था दूसरे साथियों के लिए भी वो प्रेरणास्रोत था। हमने सतेंद्र के रूप में एक हीरा खो दिया है जिसका हमें गम है लेकिन गर्व इस बात का है कि उसने देश के लिए प्राणों की आ’हूति दी। शा’हदत जैसा ओहदा हर किसी को नहीं मिलता। ये किस्मत वालों को ही मिलता है।