हरियाली तीज- 108 वर्षों की क‘ठोर तपस्या के बाद माता पार्वती को मिले थे शिव

हिन्दू धर्म में बहुत से त्योहारों को मनाने की परंपरा है उन्हीं में से एक त्योहार है हरियाली तीज का। सावन के महीने में प्रकृति में चारों तरफ हरियाली अपनी छटाएं बिखेर रही होती है इसी वजह से इस दिन को हरियाली तीज कहा जाता है। हिन्दू धर्म में महिलाओं के लिए इस त्योहार का बहुत ही अधिक महत्व होता है इस दिन को अपने पति की लंबी आयु की भगवान शिव और माता पार्वती से कामना करते हुए व्रत और पूजा पाठ करती हैं। अविवाहित लड़कियों भी इस व्रत को कर सकती हैं विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। हरियाली तीज का उत्सव प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है।

हरियाली तीज का मुहूर्त-
आरंभ   –    3 अगस्त सुबह 7 बजकर 6 मिनट से
समाप्ति –    4 अगस्त सुबह 3 बजकर 36 मिनट पर।

हरियाली तीज का है विशेष महत्व-


इस दिन को महिलाएं अपने पति के लिए पूजा पाठ करती हैं ये उनका उनके पति के प्रति समर्पण का दिन होता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता-पार्वती की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। माता पार्वती को भगवान शिव को पति के रूप में पाने में 108 वर्षों की घोर तपस्या करनी पड़ी थी तब जाकर उन्हें भगवान शिव की पति के रूप में प्राप्ति हुई थी। तीज का ये दिन माता पार्वती को ही समर्पित होता है।

ऐसे मनाया जाता है हरियाली तीज का त्योहार-
इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत करती हैं। लेकिन ये व्रत बेहद ही खास होता है क्योंकि इस दिन महिलाएं दिन भर हरियाली तीज के गीत गाती हैं नाचती हैं, यहां तक की इस दिन झूले-झूलने की भी खास परंपरा है। झूले झूले के लिए विशेष रूप से लोग पेड़ों में झूले डालते हैं जिसका बच्चों के साथ-साथ महिलाएं भी भरपूर आनंद लेती हैं।

इस दिन हरी चूड़ियां और हरी साड़ी पहनने का भी बहुत महत्व होता है। शाम को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं। पूरे दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं उसके बाद रात में घर में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं जैसे कि खीर, पूरी, सब्जी, हलवा।

इसके साथ नहीं होगा व्रत सफल- अगर महिलाएं चाहती हैं कि उनका व्रत सफल हो तो उसके लिए उन्हें इस दिन बिल्कुल भी क्रोध नहीं करना चाहिए।

पूजा की विधि-
1. सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें।

2. अपने पूजा घर में काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश भगवान की मूर्तियां बनाएं।

3. भगवान को फल-फूल अर्पित करें।

4. माता पार्वत की सुहाग की सभी चीजें चढ़ाएं और भगवान शिव को पीले वस्त्र और बेल पत्र चढ़ाएं।

5. व्रत की कथा सुनें और आरती करें।

6. दूसरे दिल माता पार्वत को सिंदूर लगाए़ं और भोग लगाएं, इसके बाद स्वयं प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलें।