जेट एयरवेज मामले में नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान

New Delhi: निजी क्षेत्र की एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं है।एक तो कंपनी पहले से ही दिवालिया हो चुकी है,और अब सरकार की तरफ से भी जेट एयरवेज को निराशा हांथ लगी है।

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार जेट एयरवेज के लिये फंड जुटाने में इस कंपनी को कोई भी सहायता प्रदान नहीं करेगी।क्योंकि यह सरकार की भूमिका नहीं है।कंपनी की जो भी समस्याएं हैं वह कंपनी का अंदरूनी मामला है।और सरकार का इससे कुछ भी लेना देना नहीं है।आवश्यक संशाधनों की आपूर्ति करना और कंपनी के संचालन के लिये उचित प्रबंध करना यह दोनों ही इस एयरलाइंस कंपनी की जिम्मेदारी है।

गौरतलब है कि एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज बंद हो चुकी है,और अदालत में इस कंपनी को खुद पर दिवालिया का मुकदमा भी झेलना पड़ रहा है।यही नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने जेट एयरवेज के फाउंडर और पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल के विदेश जाने पर भी रोक लगा दी है।दिल्ली हाई कोर्ट ने ने कहा है कि गोयल अगर विदेश जाना चाहें तो पहले 18 हजार करोड़ रुपए की गारंटी दें।

जेट में हिस्सेदारी बेचने के लिए बिडिंग प्रक्रिया फेल होने की वजह से कर्जदाताओं ने इस एयरलाइंस के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया में जाने का फैसला लिया था, ताकि कर्ज की वसूली कर सकें। जेट एयरवेज पर बैंकों का 8,500 करोड़ रुपए का कर्ज है।

बैंकों के कर्ज के अलावा जेट एयरवेज पर सैंकड़ों वेंडर्स, एयरक्राफ्ट लीजदाताओं के 10,000 करोड़ रुपए और कर्मचारियों के वेतन के 3,000 करोड़ बकाया हैं। एयरलाइंस के करीब 23,000 कर्मचारियों को मार्च से वेतन नहीं मिला है। पिछले कुछ सालों में जेट को 13,000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। एयरलाइंस की कुल देनदारियां 36,500 करोड़ रुपए तक हैं।

400 करोड़ रुपए की इमरजेंसी फंडिंग नहीं मिलने की वजह से 17 अप्रैल को जेट ने सभी उड़ानें बंद कर दी थीं। उसके बाद जेट का भविष्य पूरी तरह से बैंकों की ओर से मांगी गई बोलियों से मिलने वाले निवेश पर टिक गया था, लेकिन बिडिंग सफल नहीं रही।

कर्ज में फंसी जेट एयरवेज के रेजोल्यूशन प्लान के तहत नरेश गोयल और पत्नी ने इस साल मार्च में एयरलाइन के बोर्ड से इस्तीफा दिया था। नरेश गोयल ने चेयरमैन का पद भी छोड़ दिया था। गोयल ने 1993 में जेट एयरवेज की स्थापना की थी। जेट एक दौर में देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइंस थी।