गु’स्ताखी माफ: आंखों की गु’स्ताखियां माफ हों

 “नैनों से नैनों को मिला”। यहां हम नैनो कार की नहीं बल्कि का’तिल नजरों की बात कर रहे हैं। जी हां, वहीं नजर जिसे चीन से मिलाकर बात करने की बात पीएम मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में की थी। तब लोगों को पता ही नहीं चला था कि ये “नैना ठ’ग लेंगे”। पांच साल के वनवास के बाद आखिरकार एक बार फिर से नैनों की बात हो रही है लेकिन इस बार “नैनों की बात होगी आज़म खान के साथ।”   

2014 में जब मोदी जी ने चीन से आंख में आंख डालकर बात करने का धांसू डायलोग जनता के बीच छोड़ा था तो चारों ओर मोदी-मोदी का जयकारा लग गया था,ठीक पांच एक बार से आंख में आंख डालकर बात करने का डायलॉग बोला गया है लेकिन तब के और अब के डयलॉग में बहुत अंतर है।

तब डायलॉग बोला था मोदी ने और उससे टपक रहा था वीर रस,इस बार डायलॉग बोला है आजम खान ने लेकिन इस बार वीर रस नहीं बल्कि ठ’रकपना टपका है।

मोदी और आजम दोनों के बयान एक जैसे पर भाव अलग-अलग। एक के पंच ने तालियों की गड़गड़हट बटोरी तो एक के ऊपर गा’लियों का ढेर लग गया है। आजम खान ने मोदी के आंख से आंख मिलाकर बात करने बाले बयान को ज्यादा ही सीरियस ले लिया इसलिए संसद में ही करने लगे “आंखों से गु’स्ताखियां।”

उनकी गु’स्ताखी पर जब माफी मांगने के लिए कहा गया तो अब तक जनाब ने माफी नहीं मांगी है। लेकिन जिस तरह का सोशल मीडिया से लेकर संसद के नैतिक शिक्षा पढा़ने वाले लोगों के जुबानी ह’मले हो रहे हैं लग रहा है एक दो दिन में उन्हें बोलना ही पढ़ेगा “आंखों की गु’स्ताखियां माफ हो”

kaushlendra

सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लिखने में दिलचस्पी है।गांधी जी का फैन हूँ।समाज में जागरुकता लाना उद्देश्य है।पत्रकारिता मेरा प्रोफेशन है,जुनून है और प्यार भी है।
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