नानक ज्ञान की नदियां हर दिशा में बहती जाएं, जो नहाए सो सुख पाए, जो न नहाए वो क्या समझ पाए

New Delhi : नानक सिखों के पहले गुरू और गुरू ग्रंथ साहिब के रचयिता हैं। जिन्होंने विश्व को ज्ञान का प्रकाश दिया जिससे आज भी लोगों का जीवन जगमगा रहा है। नानक के बचपन की उदारता ने ही उन्हें बड़े होकर मानव सेवा के लिए प्रेरित किया था। उनके बचपन की ऐसी बहुत सी कहानियां हैं जिसमें से एक ये भी है।

गुरू नानक का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। पढ़ने के लिए पिता स्कूल में भेजते तो वहां पढ़ाई नहीं करते उल्टा मास्टर जी को कहते कि मुझे ऐसा पाठ पढ़ाओ जिससे मैं ईश्वर के और करीब पहुंच जाऊं। मास्टर जी को उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिलता और पिता भी नानक के इन बेतुके सवालों से परेशान हो गए थे। पिता ने सोचा पढ़ाई तो करता नहीं है तो क्यों न इसे खेतों के काम में लगा दूं।

जीवन की नई दिशाओं की तलाश में।

पिता ने नानक को खेत की रखवाली के लिए भेज दिया। वहां चिड़िया आकर दाना चुगने लगीं। नानक ने सोचा कि ये खेत ईश्वर का है और ये चिड़िया भी उसकी। ये सोचने के बाद उन्होंने किसी भी चिड़िया को नहीं उड़ाया। हुआ ये कि आसमान से सैंकड़ों चिड़िया आईं और दाना चुगने लगीं और नानक मन ही मन खुश। बार बार बाहें खोले उन्हें बुलाते और कहते राम दी चिड़िया राम दा खेत, खाओ री चिड़िया भर भर पेट।

उनके इस कारनामे की खबर जब पिता को लगी तो वो भागते हुए खेत पर पहुंचे। नानक ने उन्हें चिड़िया उड़ाने से मना कर दिया और बोले कि पिता जी इन्हें मत भगाइए सब ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए उसको सबकी चिंता रहती है हमारी भी और इन चिड़ियों की भी।

जीवन में उनकी उदारता के बहुत से किस्से हैं। पिता ने उन्हें बदलने के लिए उन्हें गृहस्थ जीवन में भी बांधा। लेकिन उनका परोपकार और दयालुता वाला व्यवहार नहीं बदला। एक दिन दो पुत्र और पत्नी को छोड़ सत्य की खोज में निकल पड़े।