भारत के अलावा पाकिस्तान-बांग्लादेश में भी विराजमान हैं देवी सती

New Delhi: भारत में देवी सती के कई शक्तिपीठ (Shakti Peethas) है। लेकिन आज हम आपको उन शक्तिपीठों के बारे में बता रहे हैं जो भारत के बाहर विदेशों में स्थित हैं।
शक्तिपीठों से जुड़ी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र थे और सती के पिता थे। सती भगवान शिव की पहली पत्नी थी। राजा दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवी-देवताओं, ऋषियों और संतों को आमंत्रित किया। लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था। इस घटना से सती ने अपमानित महसूस किया क्योंकि सती को लगा राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया है। सती ने यज्ञ की अग्नि में कूद कर अपने प्रा’ण त्याग दिए।

सती के वियोग में भगवान शिव ने सती के शरीर को कंधे पर उठा तां’डव नृत्य करना आरंभ कर दिया। तब भगवान विष्णु ने शिवजी को रोकने के लिए सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टु’कड़े कर दिए। ऐसे में जहां-जहां सती के शरीर के अंग, वस्त्र और अभूषण गिरे वह स्थान शक्तिपीठ बन गए। कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठ है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित है। माता सती के कुछ अंग और आभूषण देश के बाहर भी गिरे थे जहां आज भी शक्तिपीठ (Shakti Peethas) स्थित है। तो आइए जानते हैं देवी के उन प्रसिद्ध शक्तिपीठों के…

बांग्लादेश में शक्तिपीठ

देश के बाहर बांग्लादेश में देवी सती के 4 शक्तिपीठ (Shakti Peethas) मौजूद हैं। पहला शक्तिपीठ के बरीसल शहर में स्थित है, जहां इस शक्तिपीठ को उग्रतारा शक्तिपीठ कहा जाता है जो सुनंदा नदी के तट पर स्थित है। इस स्थान पर माता सती की नाक गिरी थी। इस कारण से इस शक्तिपीठ को सुगंधा शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है।

इसके अलावा बांग्लादेश में 3 स्थानों पर भी शक्तिपीठ है। अपर्णा शक्तिपीठ बांग्लादेश के भवानीपुर गांव में है। इस स्थान पर सती की बाएं पैर की पायल गिरी थी। माता का तीसरा शक्ति पीठ चटगांव में स्थित है जहां पर माता की दायी भुजा गिरी थी। जबकि बायीं हथेली बांग्लादेश के यशोर नामक शहर में गिरी थी। यहां देवी सती यशगोरेश्वरी और भगवान शिव चंद्र रूप में विराजमान हैं।

नेपाल के शक्तिपीठ

भारत के एक अन्य पड़ोसी देश नेपाल में भी देवी सती के कई शक्तिपीठ हैं। नेपाल के गंडक नदी पर आद्याशक्ति का पीठ है। इस स्थान पर माता सती का दांया गाल गिरा था। इस स्थान पर देवी को गंडकी रूप में पूजा जाता है। वहीं नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के पास गुहेश्वरी मंदिर में माता के दोनों घुटने गिरे थे। इस अलावा नेपाल के जनकपुर में वनदुर्गा और जयमंगला को भी शक्तिपीठ माना जाता है।

हिंगुला शक्तिपीठ, पाकिस्तान

देवी का यह शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है, जिसे हिंगजाल देवी के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार इस स्थान पर देवी सती का सिर गिरा था। पाकिस्तान में देवी हिंगलाज को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहा जाता है।

मानस शक्तिपीठ

देवी शक्ति को समर्पित मानस शक्तिपीठ तिब्बत के मानसरोवर तट पर स्थित है। यहां देवी सती का दाहिनी हथेली का गिरि थी। मान्यता है कि यहां की देवी दाक्षायणी तथा भैरव अमर हैं।