कावेरी बीज जल्द ही अपनाएंगे GMS तकनीक ताकि पैदा कर सकें हाइब्रिड कपास बीज

New Delhi : भारत की सबसे बड़ी हाइब्रिड बीज कंपनी कावेरी सीड्स जेनेटिक मेल स्टेरिलिटी तकनीक अपनाने जा रही है। इस तकनीक से वो हाइब्रिड कपास सीड्स तैयार करेगी। उनकी कोशिश है कि वो सरकार को ज्यादा से ज्यादा प्रोफिट देकर सही मात्रा में बीज उपलब्ध करवाए।

रुई की फार्मिंग चल रही ।
रुई की फार्मिंग चल रही ।

अभी कपास सीड्स को बनाने के लिए पराग कणों यानी पराग को हटाया जाता था ताकि पौधों को सेल्फ परागण से बचाया जा सके। GMS तकनीक से ये काम आसान हो जाएगा। पहले जो काम मजदूरों की मदद से होता था वो तकनीक की सहायता से फटाफट हो जाया करेगा। मजदूरों पर लगाया जाने वाला पैसा 10-12 प्रतिशत कम हो जाएगा और फायदा 200-300 प्वाइंट्स बढ़ जाएगा।

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मजदूरों को पैसा पराग कणों को इकट्ठा करने के लिए दिया जाता था। पैसा बचेगा और बीजों की कीमत कम होगी और एक पैकेट का दाम 30 – 50 रुपए हो जाएगा। कावेरी सीड्स का कहना है कि आने वाले 2-3 साल में वो सारी प्रोडक्शन GMS तब्दील कर देंगे। पत्रकारों से की जा रही बातचीत पर कहते हैं कि वो जल्द ही बायोटेक्नॉलॉजी रिसर्च और डेवलपमेंट लैब का उद्घाटन करने वाले हैं, जिसकी लागत 20 करोड़ तक होगी।

चेयरमैन जीवी भास्कर राव ने बताया की लैब के आ जाने से उनके पास बायोटेक्नॉलॉजी के सारे स्मार्ट टूल आ जाएंगे। जिससे ज्यादा पैदावार, कीटरक्षक और बीमारी रोधक और जलवायु के साथ तालमेल बिठाने वाले स्मार्ट सीड तैयार करेंगे।