सिलेंडर में मैन्युफैक्चरिंग गडबड़ी के कारण विस्फोट होने पर गैस कंपनी और डीलर दोनों होगें आरोपी

New Delhi: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने ऑयल कंपनी आईओसीएल और उसके डीलर को सिलेंडर फटने से हुई एक की मौत और एक के घायल होने पर 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यदि मैन्युफैक्चरिंग में गडबड की वजह से गैस सिलेंडर में आग लगती है तो डीलरों को हर्जाना देना होगा।

ऐसा ही एक मामला 3 अप्रैल 2003 को सामने आया था जिसमें एक महिला की मौत और एक के घायल होने पर कंपनी और डीलर को 12,21,734 रुपए का हर्जाना भरने को कहा गया है। दोनों महिलायें मॉडल टाउन में रहती थीं। नाम था नीना झांब और उसकी सास कांता झांब। अपने घर में खाना बना रही थीं। सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर लगाने के लिए उसकी कैप हटाई तो गैस फव्वारे के रूप में निकलने लगी। इसे देखकर दोनों घर से भागने लगीं लेकिन अचानक ही सिलेंडर में विस्फोट हो गया और दोनों महिलायें इसकी चपेट में आ गईं। 27 अप्रैल 2003 के दिन नीना की मौत हो गई। वहीं कांता 18 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद बच गईं।

फिर क्या हुआ

दिल्ली फायर सेवा के अधिकारियों ने बताया कि सिलेंडर में आग गैस के लीक होने की वजह से लगी थी। नीना के पति संजीव कुमार झांब ने राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। इंडियन ऑयल और डीलर एजेंसी से एक करोड़ छह लाख रुपये के हर्जाने की मांग की।

गैस कंपनी और डीलर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं

गैस कंपनी इंडियन ऑयल ने इस शिकायत का विरोध किया। उसने कहा कि वह शिकायत को सीधे सेवा नहीं पहुंचाता है। उसके अनुसार शिकायत करने वाला उसका उपभोक्ता नहीं है।

वहीं डीलर का कहना है कि बिना किसी फोरेंसिक जांच के यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि आग लने की वजह सिलेंडर में गडबडी थी। इस संबंध में कोई पुलिस शिकायत भी दर्ज नहीं है।

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आयोग का फैसला

आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह इंडियन ऑयल और डीलर दोनों की जिम्मेदारी बनती है। उनको पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए सिलेंडर में कोई लीकेज न हो। इस घटना पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।

वो बातें जो आपकी सुरक्षा से जुड़ी हैं और जरूरी भी


कुछ बातें जो एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपको जान लेना बेहद जरूरी हैं। कभी कभी आपको एक्सपायरी डेट वाला सिलेंडर भी दे दिया जाता है तो यह भी हादसे का कारण बनता है। इस डेट को जानना काफी आसान है। हर गैस सिलेंडर में एक रेग्यूलेटर लगा होता है। उसी के पास कुछ बड़े नंबर लिखे होते हैं। इन नंबरों से आप एक्सपायरी डेट को जान सकते हैं।

गैस सिलिंडर (Gas Cylinder) के सबसे ऊपर रेगुलेटर के पास जो तीन पट्टी होती है, उनमें से किसी एक पर A, B, C, D लिखा होता है। इनका मतलब यह है कि गैस कंपनी हर एक लेटर को 3 महीनों में बांट देती है। यहां पर A का मतलब जनवरी से मार्च और B का मतलब अप्रैल से जून तक होता है। इसी तरह से C का मतलब जुलाई से लेकर सितंबर और D का मतलब अक्टूबर से दिसंबर तक का होता है। अगर सिलेंडर (Gas Cylinder) पर D-19 लिख है तो यहां पर D का मतलब है कि गैस सिलेंडर (Gas Cylinder) दिसंबर के बाद एक्‍सपायर (LPG Gas Cylinder Expiry Date) हो जाएगा। वहीं 19 का मतलब है कि यह वर्ष 2019 है। यानी अगर आपके गैस सिलिंडर (Gas Cylinder) में D-19 लिखा है तो इसका मतलब है कि यह सिलेंडर (Gas Cylinder) दिसबंर 2019 को एक्‍सपायर हो जाएगा और इसके बाद इसका इस्‍तेमाल हादसे का कारण बन सकता है।

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