होली आई रे से लेकर गौरी तू लठमार तक ऐसे बदला होली के गानों का दौर,आज भी इन्हीं से होती है शुरुआत

NEW DELHI: मार्च के महीने के साथ फागुन मास की भी शुरूआत हो चुकी है। हर तरह फागुन की मीठी फुहार लोगों के दिलों में होली की यादों को ताजा कर रही हैं। हिंदी सिनेमा में होली का इतिहास भी काफी पुराना है। पहले बहुत कम ही ऐसी फिल्में देखने को मिलती थी जिसमें होली का जिक्र ना होता हो। बॉलीवुड में ज्यादातर हीरो-हीरोइन्स के प्यार का इजहार भी डायरेक्टर होली के रंग के साथ ही करते थे। खैर होली नजदीक है और हम आपको हिंदी जगत में होली के इतिहास के बारे में बताएंगे..साथ ही ऐसे होली के गानों के बारें में बताएंगे जिनके बिना होली अधूरी लगती है।

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बॉलीवुड की फिल्म मदर इंडिया जो साल 1957 में रिलीज हुई थी में एक होली सॉन्ग रखा गया था। हांलाकि उस दौर में ये गाना बहुत सुना जाता था लेकिन अब ये गाना विलुप्त हो चुका है। इस गाने के बोल है होली आई रे…। फिर 1958 में एक फिल्म रिलीज हुआ फागुन’  इस फिल्म में भी एक होली सॉन्ग फिल्माया गया जिसका नाम था पिया संग खेलो होरी..और फागुन आया रे..। ये दोनों ही गाने होली बेस्ट थे हांलाकि अभी इन गानों की पॉपुलैरिटी कम हो गई है।

साल बढ़ते गये और फिल्में आती रही। 90 के दशक में कई फिल्में आई जिनमें होली के गानों को फिल्माया गया। जैसे आई ‘जख्मी’ फिल्म का ‘आई-आई रे होली’.. नवरंग’ का ‘आया होली का त्योहार’… कोहिनूर’ का ‘तन रंग लो ली आज मन रंग लो… आपकी कसम’ का ‘जय-जय शिवशंकर’… आखिर क्यों’ का ‘सात रंग में खेल रही है जैसी तमाम फिल्में आई। लेकिन कुछ गाने आज भी दिलों में जीता है। 90 के दशक के गाने ‘जय-जय शिवशंकर’…रंग बरसे.. आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली…खेलेंगे हम होली.. अंग से अंग लगाना जैसे गाने आज भी होली की खुशी को दौगुना कर देते हैं।जैसे-जैसे साल गुजरे होली के रंग में बदलाव आया और गानों का टेस्ट भी बदला। अब ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ का गौरी तू लठमार… बद्रीनाथ की दुल्‍हनिया’…और बलम पिचकारी जैसे गानों को सुना जाता है।