राफेल विवाद: फ्रांस के अम्बेसडर ने कहा-रिलायंस और फ्रेंच कंपनी के बीच एक वैश्विक समझौता हुआ था

New Delhi: देश में जहां चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। वहीं राफेल(rafale) मामले पर फ्रांस एक अखबार के खुलासे से फिर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर है। रक्षा मंत्रालय के बयान के बाद अब फ्रेंच अम्बेसडर ने इस विवाद पर बयान दिया है। उनका कहना है कि, यह फ्रेंच कंपनी (french company) पर रिलयांस के बीच एक वैश्विक डील थी, इससे राजनीतिक फायदे का कोई लेना देना नहीं है।

दरअसल फ़्रांस के अख़बार ने दावा किया था कि, राफेल डील के बाद फ़्रांस ने अनिल अंबानी के 1100 करोड़ रुपये माफ़ कर दिए थे।

फ्रेंच अम्बेसडर ने कहा-यह राजनीतिक हस्तक्षेप के अधीन नहीं था

फ़्रांस के एक अख़बार में किये गए दावे को लेकर एक बार फिर भारत में राफेल को लेकर सियासत गर्म हो गई है। वहीं कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर है और पीएम मोदी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। तो वहीं अब राफेल डील के बाद अनिल अंबानी(Anil ambani) के 1100 करोड़ की माफ़ी वाले मामले पर अब फ्रेंच अम्बेसडर (French ambassador) ने प्रतिक्रया जाहिर की है। उनकी तरफ से जारी बयान में कहा गया कि, यह डील किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप के अधीन नहीं है। साथ ही बताया की फ्रेंच कंपनी और रिलायंस के बीच यह 2008-12 के बीच की एक वैश्विक डील हुई थी।

राफेल डील के बाद अनिल के 1100 करोड़ कर्जमाफी पर रक्षा मंत्रालय का बयान

मोदी सरकार के कार्यकाल में हुई राफेल डील को लेकर देश में पिछले काफी समय से हंगामा मचा हुआ है। वहीं आज फ़्रांस की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ, जिसके बाद कांग्रेस एक बार फिर मोदी सरकार पर जबरदस्त हमलावर है। फ़्रांस की Lemonde.fr नाम की एक वेबसाइट ने यह खबर लगाई जिसके बाद भारत में एक बार फिर मोदी सरकार पर आरोपों की बारिश शुरू हो गई। कांग्रेस ने कहा कि, मोदी ने डील में अनिल को बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल किया। साथ ही इस रिपोर्ट में यह कहा गया कि, राफेल डील के बाद ही फ्रांस ने अनिल अंबानी के 1100 करोड़ रुपये का टैक्स माफ़ कर दिया।

इस दावे को डिफेन्स मिनिस्ट्री ने सिरे से ख़ारिज करते हुए इसको गलत बताया है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि, यह आरोप बिलकुल निराधार हैं और मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।