सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों ने ली शपथ,नियुक्ति में 1 दशक से ज्यादा का समय लगा

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 4 नए जजों की नियुक्ति की गई। काफ़ी दिनों से नए जजों के नाम पर चर्चा चल रही थी जिस पर राष्ट्रपति ने शुक्रवार को मुहर लगाई दी । नियुक्त हुए जजों में जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। इन जजों की नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की निर्धारित संख्या पूरी हो गई है।

आपको बता दें कि साल 2008 में केंद्र सरकार ने SC में जजों की संख्या को 31 कर दिया था। पहले ये संख्या 26 थी। उसके बाद से अब तक जजों की ये संख्या 27 तक ही भर पाई थी। यह पहली बार है जब SC में निर्धारित सभी पदों को जजों का सौभाग्य मिला है वरना अब तक तो ये सिर्फ जजों का इंतज़ार ही कर रही थी। आपको बता दें कि कॉलेजियम ने कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार के पास नए जस्टिस की नियुक्तिओं के लिए नाम भेजे थे। तब केंद्र ने वरिष्ठता का हवाला देकर जस्टिस बोस और बोपन्ना की नियुक्ति की सिफारिश को नकार दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र की दलील को खारिज करते हुए नियुक्ति की सिफारिश दोबारा केंद्र के पास भेज दी थी। फिर इस शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को चार जजों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी किया। इसके बाद CJI गोगोई ने सभी नए 4 जजों को पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई।

जस्टिस गवई CJI बनेंगे

वरिष्ठता क्रम के मुताबिक, जस्टिस गवई 2025 में 6 महीने के लिए चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्त होंगे । वह रिटायर्ड जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद अनुसूचित जाति से आने वाले दूसरे सीजेआई होंगे। जस्टिस गवई के रिटायर्ड होने के बाद जस्टिस सूर्यकांत उनके उत्तराधिकारी बनेंगे। जस्टिस सूर्यकांत नवंबर 2025 से फरवरी 2027 तक सीजेआई का पद संभालेंगे।

जानिए इन चार जजों के बारे में

जस्टिस गवई- बॉम्बे हाईकोर्ट के जज थे । जस्टिस सूर्यकांत- हिमाचल प्रदेश हाईकोेर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। जस्टिस बोस- झारखंड हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस थे। जस्टिस बोपन्ना- गुवाहाटी हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस थे ।

ऐसे में बड़ा सवाल ये कि जब सरकार ने साल 2008 में ही जजों की पद संख्या को 26 से बढ़ाकर 31 कर दिया था तो इन पर नियुक्ति होने में इतना समय क्यों लगा? नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड और कोर्ट के वेबसाइट्स से मिले डाटा के अनुसार देश की तमाम अदालतों में 2 करोड़ 70 लाख केस पेंडिंग है। केस पेंडिंग की वहज क्या है ? वजह है सुनवाई में देरी । सुनवाई में देरी इसलिए होती है क्योंकि जजों के पद खाली है। आंकड़ों के मुताबिक देश की 24 हाईकोर्ट में 464 पद खाली पड़े है । सर्वोच्च अदालत में ही सालों से खाली पड़े महज़ 5 पदों को भरने में कॉलेजियम और सरकार को जब एक दशक से ज्यादा लग गए तो बाकि अदालतों के रिक्त पद भरने में जाने कितने दशक लग जाएंगे । स्तिथि बेहद गंभीर है ।