आज ही के दिन टेस्ट डेब्यू किया था टीम इंडिया के दो महान बल्लेबाजों ने

New Delhi:20 जून 1996 लॉर्ड्स का मैदान,इंडिया और इंग्लैंड के बीच खेला जाने वाला दूसरा टेस्ट मैच। टीम इंडिया इंग्लैंड के दौरे पर थी और इस सीरीज का पहला टेस्ट मैच हार गयी थी।

दूसरे टेस्ट में भी टीम इंडिया काफी मुश्किलों में थी,क्योंकि संजय मांजरेकर घुटने में चोट के कारण सीरीज से बहार हो गए थे। और टीम के ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू कप्तान अजहरुद्दीन से अपने विवाद के चलते सीरीज से खुद ही बाहर हो गए। ऐसे में इंडियन कप्तान ने टीम में शामिल किया दो रिजर्व प्लेयर सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड़ को।

इस मैच की पहली पारी में इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 344 रन बना डाले। टीम की तरफ से सातवें स्थान पर बैटिंग करने आये RC रसल ने शानदार शतक लगाते हुए 124 रन कूट डाले।

दूसरी पारी में बैटिंग करने आयी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। और टीम ने 60 रनों के भीतर ही अपने दोनों ओपनर बल्लेबाजों का विकेट खो दिया। टीम की तरफ से तीसरे स्थान पर बैटिंग करने के लिए आये अपना टेस्ट डेब्यू कर रहे सौरभ गांगुली। गांगुली को इससे पहले भी राष्ट्रिय टीम में शामिल किया गया था लेकिन उनको अनुशासनहीन कहके टीम से बहार कर दिया गया था। लेकिन इस दौरे में गांगुली एक रिजर्व प्लेयर के तौर पर अपनी जगह बनाने में कामयाब हो चुके थे।

टीम के तीन और बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर,कप्तान अजहरुद्दीन और अजय जडेजा भी सस्ते में निपट कर पवेलियन की ओर लौट चुके थे। और क्रीज पर बल्लेबाजी करने के लिए जो नया बल्लेबाज आया था वह भी अपना पहला ही टेस्ट मैच खेल रहा था। इस बल्लेबाज का नाम था राहुल द्रविड़। गांगुली और द्रविड़ के बीच 94 रनों की साझेदारी हुई।

उस मैच में गांगुली ने पाना पहला टेस्ट शतक जड़ा। किसी भी प्लेयर के लिए इससे खास और क्या बात हो सकती है कि अपने पहले ही मैच उसे लॉर्ड्स में खेलने का मौका मिले और उसमें वह शतक भी लगा दे।

हालाँकि रहल द्रविड़ अपने पहले टेस्ट में शतक लगाने से मात्र 5 रनों से पीछे रह गए थे। लेकिन उन्होंने 95 रनों की बेहद ही मत्वपूर्ण पारी को अंजाम दिया था। राहुल द्रविड़ ने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर मैच को बचाने का काम बखूबी किया। उस मैच में टीम का नौवां विकेट राहुल द्रविड़ के रूप में गिरा था।

हलांकि यह मैच ड्रा हो गया था। लेकिन टीम इंडिया को दो नयाब बैट्समैन मिल चुके थे। जिसमें से एक ने आगे चलकर टीम इंडिया की कमान संभाली और पूरी दुनिया को अपंनी दादागिरी दिखाते हुए दादा के नाम से मशहूर हुआ जिसका नाम सौरभ गांगुली था। और दूसरा टीम इंडिया की दीवार और MR. भरोसेमंद बना। जिसने ना जाने कितने ही मैचों में अपनी संयमित और जुझारू पारी से टीम को हारने से बचाया यह और कोई नहीं बल्कि राहुल द्रविड़ ही थे। गांगुली के बाद टीम की कमान राहुल द्रविड़ को सौपी गयी थी।