पितृपक्ष : कौए के कांव-कांव में हो सकता है पूर्वजों का सन्देश, भगाने के बजाय उसे खाना खिलाइए

New Delhi: सोलह दिनों तक चलने वाला पितृपक्ष 13 सितम्बर से शुरू होकर 28 सितम्बर को समाप्त हो रही है। इन दिनों लोग अपने पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं। इसे ‘सोलह श्राद्ध’, ‘महालय पक्ष’, ‘अपर पक्ष’ आदि नामों से भी जाना जाता है। उनके लिये पिण्डदान करते हैं। अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। पितर का मतलब है वे परिजन जिनकी मृत्यु हो चुकी है। आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी यह संसार छोड़ कर जा चुकी आत्माएं किसी न किसी रूप में श्राद्ध पक्ष में अपनी परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आती हैं। पितरों के परिजन उनका तर्पण कर उन्हें तृप्त करते हैं। इन सोलह दिनों में सबसे पहले खाना गाय और कौआ को खिलानी चाहिए। 

 

गाय और कौए के आलावा कुत्ते को भी भोजन कराया जाता है। जब युधिष्ठिर की मृत्यु हुई तो कुत्ता भी उनके साथ स्वर्ग गया था। तब से हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि अब भी कुत्ता मृत आत्माओं के साथ स्वर्ग जाता है। कौए को यमराज का भाई और संदेश वाहक माना जाता है, इसीलिए ऐसा माना जाता घर के आस-पास आये कौओं को खाना खिलाना चाहिए।

क्या करें ?

इन सोलह दिनों में सबसे पहले खाना गाय, कुत्ता और कौआ को खिलानी चाहिए।
इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
पितृपक्ष शोक व्यक्त करने का समय होता है इसलिए इस दौरान कोई भी नए कपड़े ,आभूषण नहीं खरीदने चाहिए।
हमारे पूर्वज किसी के भेष में आ सकते हैं इसलिए किसी का अनादर नहीं करना चहिये। घर आये किसी मेहमान को बिना खाना खिलाए नहीं लौटाना चाहिए।
वह घर छोड़कर नहीं जाना चाहिए , जहाँ हमारे पितर की मृत्यु हुई हो। ऐसा माना जाता है कि मरने वाले की आत्मा वहीँ लौटकर आती है जहाँ उसकी मृत्यु हुई हो।

किस दिन किसका श्राद्ध

पंचमी श्राद्ध – जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो या जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई है उनके लिए पंचमी तिथि का श्राद्ध किया जाता है।
नवमी श्राद्ध – इसे मातृनवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर श्राद्ध करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है।
चतुर्दशी श्राद्ध – इस तिथि उन परिजनों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो।
सर्वपितृ अमावस्या – जिन लोगों के मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध आमावस्या को किया जाता है।