अफगानिस्तान की तरह केंद्र सरकार को भी पाकिस्तान से करनी चाहिए शांतिवार्ता : फ़ारुख़ अब्दुल्लाह

New Delhi : गुरुवार को नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र की भाजपा सरकार से कश्मीर मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के रास्ते खोलने के लिये कहा है। उन्होंने कहा अफ़ग़निस्तान में जारी हिं’सा के बाद भी किस तरह सरकार ने ता’लिबान नेताओं से बात कर हिं’सा रोकने के प्रयास किये है।

फ़ारूख़ अब्दुल्ला ने कहा केंद्र सरकार कहती है पाकिस्तान पहले आ’तंकवाद ख़’त्म करे तभी शांतिवार्ता शुरू की जा सकती है। केंद्र सरकार को अफगानिस्तान पर गौर करना चाहिए उन्होंने किस तरह देश में हिं’सा जारी होने के बावजूद अफगानी सरकार ता’लिबान नेताओं के साथ शांतिवार्ता आयोजित कर रही है। अब्दुल्ला ने कहा कि देश में जारी हिं’सा के बावजूद, केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर पर वही नीति अपनाई जानी चाहिए।उन्होंने कहा, “सु’रक्षा बलों, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अन्य एजेंसियों द्वारा किए गए उ’त्पीड़न से कश्मीर की स’मस्या हल नहीं होगी।”

आपको बता दें हाल ही में अफगानिस्तान सरकार ने देश में शांति के लिए ता’लिबानी नेताओं और अफ़ग़ानी अधिकारियों के बीच कतर की राजधानी दोहा में शांति वार्ता आयोजित की थी।  वार्ता के पहले दिन को दोनों पक्षों द्वारा सकारात्मक बताया गया था, तालिबान द्वारा ग़ज़नी प्रांत में किये गए एक वि’स्फोट के बाद शांतिवार्ता के लिये राजी हुये थे जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौ’त और 50 अन्य घा’यल हो गए थे।

इसके साथ ही फारुख अब्दुल्ला ने केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार घाटी में लोगों को विभाजित करने के उद्देश्य से कश्मीर में आरएसएस की शाखाएं खोलने की कोशिश कर रही है। फारुख अब्दुल्ला ने कहा “1947 में, भारत एक अलग देश था। लेकिन आज, यह बदल गया है क्योंकि वे अब हिंदू राष्ट्र चाहते हैं और इसलिए वे कश्मीर के लोगों को वि’भाजित करने के उद्देश्य से आरएसएस की शाखाएं खोलने की कोशिश कर रहे हैं। इस तूफ़ान से बचने के लिए लोगों को उनके खि’लाफ आवाज उठानी चाहिए।”