भारतीय अंतरिक्ष की नींव रखने वाले विक्रम साराभाई की जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर किया सलाम

New Delhi : भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक और एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने आज के ही दिन यानि 12 अगस्त 2019 को ही इस पृथ्वी पर जन्म लिया था। इनका जन्म गुजरात के अहमदाबाद की भूमि पर हुआ था। आज गूगल ने भी डूडल बनाकर विक्रम साराभाई के जन्मदिन को खास बनाया है। वे अपनी माता सरला देवी और पिता अंबालाल की आठ संतानों में सबसे छोटे थे।

ये बहुत ही अमीर घराने से आते थे। इनके पिता बहुत बड़े उद्योगपति थे, उनके नाम से कई मीलें चलती थीं। साराभाई का परिवार स्वतंत्रता अभियान में शामिल था इसलिए उनके घर पर बड़े -बड़े स्वतंत्रता सेनानी आया करते थे। इनके घर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर, मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू अक्सर आया करते थे जिसका इनके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।

गुजरात से ही इंटरमीडियट और फिर महावि्यालय से स्नातक किया। उसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए। उन्होंने इंग्लैंड के कैंब्रिज युनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और अपनी शिक्षा पूरी की। 1940 में उन्हें प्राकृतिक विज्ञान में योगदान देने के लिए ट्रिपोस भी दिया गया। जब दूसरे विश्वयुद्ध की तैयारियां चल रही थीं तो वह अपने देश वापस आ गए और भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर में शामिल हो गए। उन्होंने सर सी. वी. रमन के मार्गदर्शन में अंतरिक्ष किरणों पर खोज की शुरूआत की। युद्ध समाप्त होने के बाद वे फिर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी लौट गए और अंतरिक्ष किरणों पर उनके थीसिस उष्णकटिबंधीय अक्षांश की खोज की जिसके लिए उन्हें 1947 में पीएचडी की उपाधि भी मिली।

 प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर से रचाया था विवाह

पारिवारिक जीवन की बात करें तो विक्रम साराभाई का विवाह प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर मृणालिनी साराभाई से हुआ। जिस समय इनका विवाह हुआ उस समय महात्मा गांधी का ‘भारत छोड़ो आं’दोलन’ चल रहा था। इस वजह से इनकी शादी में इनके परिवार से कोई नहीं आ पाया था।  इनका वैवाहिक कार्यक्रम चेन्नई में आयोजित किया गया था।  विक्रम और मृणालिनी के दो बच्चे थे। जिनके नाम  कार्तिकेय साराभाई और मल्लिका साराभाई था। मल्लिका साराभाई एक प्रसिद्ध डांसर है।

30 दिसंबर 1971 का दिन था जब विक्रम साराभाई  स्वर्ग को सि’धार गए। इनका निधन केरला के तिरुअनंतपुरम के कोवलम में हुआ था। वे थुम्बा रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिये तिरुअनंतपुरम गये थे। अंतिम दिनों में ज्यादा यात्रायें और काम के बोझ की वजह से उनकी सेहत ख़’राब होने लगी थी। कहा जाता है इसी वजह से उनकी मृ’त्यु भी हो गई थी।

विक्रम साराभाई की बड़ी उपलब्धियों में से एक थी इसरो की स्थापना

डॉ. साराभाई की महान उपलब्धियों में से एक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना थी। जब रूस ने अपना प्रथम अंतरिक्ष अभियान स्पुतनिक का प्रमोचन किया उसके बाद उन्होंने भारत सरकार को भी अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व को बताया। भारतीय परमाणु विज्ञान कार्यक्रम के जनक के रूप में जाने जाने वाले डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने भारत में प्रथम राकेट प्रमोचन केंद्र की स्थापना में डॉ.साराभाई का पूरी तरह से समर्थन किया था। बता दें कि अंतरिक्ष संबंधी प्रक्षेपण के लिए थुम्बा में एक केंद्र की स्थापना की गयी। यह केंद्र मुख्यतः भूमध्यरेखा से उसकी निकटता की दृष्टि से, अरब महासागर के तट पर, तिरुवनंतपुरम के पास स्थापित किया गया।

साराभाई परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी थे। वह न केवल वैज्ञानिक थे बल्कि कई संस्थानों की नींव भी रखी थी। उन्होंने अहमदाबाद में  उद्योगपतियों के साथ मिल कर भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIM ) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । उनके प्रयासों से भारत ने भी अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम  सफल हुए। पुरुस्कारों की बात करें तो  डॉ॰ विक्रम साराभाई को 1962 में शांति स्वरुप भटनागर मैडल प्रदान किया गया। सन 1966 में  साराभाई को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

उनका कहना था …

  • जो इंसान भरी कोलाहल में संगीत को सुन सकता है वह वास्त में जीवन में महान उपलब्धि हासिल करता है। 
  • जब आप भीड़ से ऊपर खड़े होते हो तो आपको अपने ऊपर पत्थर फेंकने के लिए तैयार रहना चाहिए
  • मेरा यह मानना हैं की जिस इंसान के पास समय के लिये सम्मान नहीं हैं और समय की भावना नहीं हैं वह कुछ कम ही प्राप्त कर सकता हैं। 
  •  आज हमारी नौकरशाही भी फुला हुआ हैं इसलिये ये बोझ हैं। 
  • आनंद पर हमारा विश्वाश हमेशा रहा है, लोगो की ऊर्जा को फैलने दो