वेंकैया नायडू का एलान, अब 11 नहीं 22 भाषाओं में बोल सकेंगे राज्यसभा सदस्य

वेंकैया नायडू का एलान, अब 11 नहीं 22 भाषाओं में बोल सकेंगे राज्यसभा सदस्य

By: Pooja gour
July 11, 09:07
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NEW DELHI: जल्द ही शुरू होने वाले मानसून सत्र में राज्यसभा सदस्य अपनी क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग कर पाएंगे।

इस बात की आधिकारिक घोषणा राज्यसभा की सभापति वैंकेया नायडू ने की है। ये फैसला अपने सदस्यों के बीच भाषाई विविधता को बढ़ावा देने के लिए लिया गया हैं।  और अब उन्हें 22 अनुसूचित भाषाओं में से किसी एक में बात करने की अनुमति देगी। द हिंदू के मुताबिक18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र से शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा सचिवालय पांच और भाषाओं जैसे डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संथाली और सिंधी के लिए अनुवाद की व्यवस्था की हैं और इसके लिए  विश्वविद्यालयों, दिल्ली में संबंधित राज्यों के मिशन, और विभिन्न कल्याण संघों से परामर्श किया जा रहा हैं। बता दें कि 22 भाषाओं में राज्यसभा में पहले से ही 12 भाषाओं असम, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलगु और उर्दू में अनुवादक की व्यवस्था है। जबकि, बोडो, मैथली, मणीपुरी, मराठी, नेपाली भाषाओं में लोकसभा के अनुवादकों की व्यवस्था की जा रही है।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने नये अनुवादकों के एक समूह को प्रशिक्षण और योग्यता पूरी होने का प्रमाणपत्र दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा ‘‘मुझे हमेशा से यह महसूस होता रहा है मातृभाषा भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका है,। ये हमारी भावनाओं और विचारों को बगैर किसी अवरोध के जाहिर करने के लिए  का सबसे अच्छा म  माध्यम बन सकती हैं।’’ उन्होंने कहा कि संसद जैसी बहुभाषी संस्था में सदस्यों को भाषाई बाधाओं के चलते अन्य की तुलना में खुद को छोटा महसूस नहीं होने देगा।

इससे पहले राज्यसभा में 12 भाषाओं में अनुवादकों की व्यवस्था थी। शेष पांच भाषाओं जैसे मैथिली, मणिपुरी, मराठी, बोड़ो और नेपाली के लिए लोकसभा के अनुवादकों को नियुक्त किया गया है। नायडू ने जब सभापति का पद संभाला था, तब उन्होंने कहा था कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में सांसदों को बोलने की व्यवस्था की जाएगी ताकि वह अपने विचारों को बेहतर तरीके से रख सकें।

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