मध्यप्रदेश: पैर से लिखने वाले पारसिंह को प्रशासनिक मदद के बाद मिला स्कूल में दाखिला

मध्यप्रदेश: पैर से लिखने वाले पारसिंह को प्रशासनिक मदद के बाद मिला स्कूल में दाखिला

By: Manvi
August 10, 09:06
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NEW DELHI: मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल बड़वानी जिले में रहने वाले पारसिंह परिहार को कई विद्यालयों के चक्कर लगाने के बाद एक सरकारी स्कूल में दाखिला मिला है। कक्षा नौ में दाखिले के लिए उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा।


पारसिंह अपने दोनों हाथों से लाचार हैं। लेकिन उन्होंने पैर से लिखने की विलक्षण प्रतिभा विकसित कर ली है। इसके बावजूद कोई भी स्कूल इस प्रतिभाशाली छात्र को दाखिला देने को तैयार नहीं था। जिला प्रशासन की मदद के बाद उसे अपनी पढ़ाई जारी रखने मौका मिला है।दिव्यांग होने की वजह से विद्यालयों में दाखिला नहीं मिलने से तंग आकर पारसिंह ने जिला प्रशासन से मदद की मार्मिक गुहार लगाई। उन्होंने जिला प्रशासन को दिेए आवेदन में कहा कि वे आगे पढ़ना चाहते हैं। जिसके बाद जिला प्रशासन ने उनका दाखिला बड़वानी के एक सरकारी स्कूल में करा दिया है।


अम्बापानी गांव के निवासी पारसिंह को शारीरिक विकृति के कारण स्पष्ट बोलने में भी तकलीफ होती है। उन्होंने अपने गांव के शासकीय मिडिल स्कूल से आठवीं पास की। यहां से आगे का सफर उनके लिए कई मुसिबतें लिए खड़ा था। तमाम प्रयासों के बावजूद प्रयाप्त अंक होने के बाद भी उन्हें किसी भी विद्यालय में नौवीं में दाखिला नहीं मिला। थक-हारकर उन्होंने 7 अगस्त को जिला प्रशासन से गुहार लगायी और दिव्यांगता के कारण हुए कथित भेदभाव की आपबीती सुनायी।आदिवासी छात्र ने अपने आवेदन में कहा, “मैं गरीब परिवार से ताल्लुक रखता हूं और आठवीं में पास होने के बाद आगे पढ़ना चाहता हूं। लेकिन मुझे किसी भी शैक्षणिक संस्था में दाखिला नहीं दिया जा रहा है। मुझे न तो सरकारी, न ही निजी स्कूल में प्रवेश दिया जा रहा है। मास्टरों का कहना है कि मैं पैर से लिखता हूं, इसलिये मुझे प्रवेश नहीं दिया जायेगा।”

बहरहाल, इस अर्जी पर सरकारी तंत्र में हुई हलचल के कारण पारसिंह को बड़वानी के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक दो की कक्षा-नौ में प्रवेश मिल गया है। वहीं, 14 वर्षीय पारसिंह को स्कूल में दाखिला दिलाने के बाद अब प्रशासन उन शैक्षणिक संस्थाओं के खिलाफ जांच कर रहा है जिन्होंने जनजातीय समुदाय के दिव्यांग छात्र को प्रवेश देने से मना किया था।इस बात जिलाधिकारी अमित तोमर ने बताया कि शिक्षा विभाग के डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर को आदेश दिया गया है कि वह जांच कर पता लगायें कि संबंधित स्कूलों ने उसे दाखिला देने से किस आधार पर इंकार किया था। उन्होंने कहा कि मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कदम उठाये जायेंगे।

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