कानपुर IIT का खुलासा, क्यों खेलते समय स्विंग होती है क्रिकेट बॉल

कानपुर IIT का खुलासा, क्यों खेलते समय स्विंग होती है क्रिकेट बॉल

By: Pooja gour
July 11, 11:43
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NEW DELHI: क्रिकेट की बात आने पर रिवर्स स्विंग या "इन-डिप्पर" शायद सबसे दिलचस्प चालों में से एक है, खासकर तेज गेंदबाजी में।

स्विंग गेंदबाजी तब होती है जब गेंद, बल्लेबाज के प्रति घुमावदार रास्ता ले लेती है। जिससे एक बार के लिए बैट्समैन बॉल की डायरेक्शन देखकर उलझन में पड़ जाता हैं। आईआईटी कानपूर ने इस बात का खुलासा किया हैं कि गैंद किन परिस्थितियों में स्विंग होती है।

दरअसल आईआईटी कानपूर ने इस बात का खुलासा किया हैं कि कैसे एक गेंदबाज बॉल को स्विंग करा सकता हैं। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों ने क्रिकेट मैच में स्विंग बाल विश्लेषण कर ये बात जानने की कोशिश की। आईआईटी के प्रो. संजय मित्तल जो कि अंतरिक्ष अभियांत्रिकी विभाग में काम करते हैं ने अपने दो छात्रों राहुल देशपांडे तथा रवि शाक्या के साथ मिलकर इसपर संसोधन करना शुरु किया। प्रो. संजय मित्तल की टीम ने प्रयोगात्मक अध्ययन से प्राप्त परिणामों को और अधिक सटीक बनाने के लिए कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग का भी उपयोग किया है। और जानकारी इकट्ठा करने के लिए प्रोफेसर ने रन-अप गेंदबाजी कार्रवाई। साथ ही मौसम की स्थिति, पिच की स्थिति, मौसम जैसे कई कारकों पर भी शोध किया।

शोध में पाया कि जब बॉल की गति की दिशा में 20 डिग्री झुकाया जाता है तो बॉल 30 से 119 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्विंग होती है। गति 125 किमी/घंटा से ऊपर होने पर बॉल में रिवर्स स्विंग हो जाता है। शोध में यह भी ध्यान दिया गया है कि स्विंग आमतौर पर ठंडी जगहों में अच्छी तरह से होती है जहां हवा गर्म, और मौसम चिपचिपा होता है, वहां स्विंग करना थोड़ा मुश्किल हो जाता हैं। वहीं दर्शको के बीच एक बात भम्र की तरफ फैली हुई है कि अगर गेंद नई होगी, तभी उसे स्विंग किया जा सकता है। लेकिन बॉल नई हो या पुरानी इसका बॉल के स्विंग होने से कोई लेना देना नहीं है।

बॉल को स्विंग कराने के लिए सबस जरुरी है बॉल की स्पीड और उस दिशा की तरफ बॉल का झुकाव। साथ ही पिच का खुदरापन और गेंद दोनों स्विंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।वहीं ध्यान देने वाली बात ये हैं कि बॉल टेंपरिंग जैसे मामलों में एक तेज गेंदबाज गेंद की मोटाई को एक मिलीमीटर तक कम करने के लिए किसी न किसी चीज का इस्तेमाल करता है। या यू कहें कि गेंद के साथ छेड़छाड़ करता हैं। ऐसा करने पर गेंद, सामान्य गेंद की तुलना में ज्यादा तेजी से स्विंग होती है।

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