कुत्ते फेफड़े के कैंसर को 97 प्रतिशत सटीकता से सूंघ लेते हैं- शोध

अमेरिका में हर साल 2 लाख लोगों में इसकी पहचान होती है

नई दिल्लीः एक नए अध्ययन में इस बात का दावा किया है कि कुत्ते 97 प्रतिशत सटीकता के साथ फेफड़ों के कैंसर का पता लगा सकते हैं। ये इस बीमारी की पहचान करने में एक बड़ी सफलता है। ये अध्ययन American Osteopathic Association Journal में प्रकाशित हुआ। American Osteopathic Association के शोधकर्ताओं ने कहा कि ये अद्भूत सटीकता भविष्य में लोगों में कैंसर की जांच का एक सुरक्षित, सस्ता और प्रभावी विकल्प हो सकता है। इसके लिए beagles को चुना गया क्योंकि उनके सुंघने की क्षमता दूसरी नस्ल के कुत्तों से ज्यादा होती है। ये रोगियों से लिए गए खून के नमूनों में अंतर करने में सक्षम थे, जो कि घातक फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे और जो कि पूरी तरह से स्वस्थ थे और ऐसा उन्होंने 97 प्रतिशत सटीकता के साथ किया।

जो कैंसर चिकित्सक अपने रोगियों में बहुत सटीकता के साथ फेफड़ों के कैंसर की पहचान करना चाहते हैं लेकिन वो उसके लिए महंगे तरीकों का इस्तेमाल नहीं चाहते वो इसमें अपने कुत्तों की मदद ले सकते हैं। मुख्य अध्ययनकर्ता Thomas Quinn ने कहा कि हम गंध की परतो में अंतर करने के लिए कुत्तों का इस्तेमाल करते है जब तक कि वो रोग की पहचान नहीं कर लेते। उन्होंने ये भी कहा कि अभी आगे बहुत सा काम करना बाकी है लेकिन हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं।

इसी अध्ययन के एक दूसरे भाग पर भी शोधकर्ता काम कर रहे हैं जिसमें beagles रोगी की सांस के नमूनों को सूंघ कर उनमें फेफड़ों, स्तन और colorectal cancer की पहचान करेंगे। उन्होंने कहा कि ये अध्ययन फेफड़ों के कैंसर का इतनी जल्दी पता लगाने में पहला कदम हो सकता है जिससे कि उसका इलाज हो सके। उन्होंने कहा कि अब ये लगता है कि कुत्तों में हमारी सबसे उन्नत तकनीक से भी बेहतर कैंसर की जाँच करने की प्राकृतिक क्षमता होती है। फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में दुनिया भर में पुरुषों और महिलाओं में मौ‘त का एक प्रमुख कारण है। अमेरिका में हर साल 2 लाख से ज्यादा लोगों में फेफड़े के कैंसर की पहचान होती है।